कोविड–१९ के संकटकाल में लंबे लॉक डाउन के दौरान यद्यपि सभी क्षेत्रों का खास्ता हाल है । लेकिन सबसे बुरा हाल है शिक्षा जगत का । शैक्षिक सत्र के अन्त समय कोरोना के भय की वजह से सबसे पहले देश के भविष्य ‘बच्चाें’ं को बचाने के लिए पूरे देश के विद्यालयों को बन्द कर दिया गया । विद्यार्थियों की बाधित शिक्षा को देखते हुए कुछ साधन संपन्न स्कूल–कॉलेजों ने ऑन लाइन पढ़ाई शुरू की । नेपाल सरकार ने भी लंबे विचार विमर्श के बाद आषाढ़ १ गते से वैकल्पिक माध्यम का उपयोग कर शैक्षिक गतिविधि को आगे बढ़ाने का निर्देंशन जारी किया है । नेपाल में पिछले तथ्यांक अनुसार देश भर में विद्यालय में प्रारंभिक बाल विकास केंद्र से लेकर कक्षा १२ तक ८२ लाख ५८ हजार ७८३ विद्यार्थी हैं । उसी तरह उच्च शिक्षा में करीब ७ लाख विद्यार्थी हैं । इस तरह विद्यालय और उच्च शिक्षा को मिलाकर लगभग ९० लाख जनसंख्या कोविड–१९ से बुरी तरह प्रभावित है । सरकार द्वारा जारी निर्देशन अनुसार वैकल्पिक विधि के अंतर्गत परम्परागत और आधुनिक दोनाें विधि आती है लेकिन अभी की परिस्थिति में ऑन लाइन शिक्षा ही प्रमुख और उपयोगी बनी हुई है । शैक्षिक क्षेत्र में ऑन लाइन पद्धति संसार के कई विकसित देश बहुत पहले से ही आत्मसात् किए हुए हैं । आगामी कुछ महीनों तक विद्यालय न खुलने की स्थिति में बच्चों को ऑन लाइन क्लास में व्यस्त रखने के अलावा और कोई विकल्प ही नहीं है । लेकिन यह विकल्प भी सामुदायिक विद्यालय केलिए जितना उपयोगी हो सकता है उतना सरकारी विद्यालयों में नहीं । वैसे भी ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश विद्यार्थियों के पास मोबाइल और इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध नहीं है ।

स्पष्ट है सुविधाहीन और आर्थिक दृष्टि से कमजोर परिवारों के विद्यार्थी के लिए ऑन लाइन शिक्षा आकाश से तारे तोड़ने जैसा ही है ।
उच्च शिक्षा में अध्ययनरत विद्यार्थी स्वयं अध्ययन और समय के प्रति सचेत होने के कारण समय और परिस्थिति का महत्व समझते हुए उसका सही उपयोग कर सकते हैं । लेकिन १०–११वर्ष से लेकर१६–१७ वर्ष तक बच्चे कोमल होते हैं । ऐसे मानसिक रूप से अपरिपक्क बच्चों को कोई भी बरगला सकता है । लॉकडाउन के समय विश्व के साथ साथ नेपाल में भी साइबर बुलिंग बढ़ने की घटना सार्वजनिक होती रही है । हमारे बच्चे ऐसी घटना के शिकार नहीं हो सकते, कहा नहीं जा सकता । लॉकडाउन के कारण सृजित वातावरण में कई बच्चों में असामान्य मानसिक अवस्था दिखनी अस्वाभाविक नहीं है । बच्चों को इंटरनेट का लत लगने और लगातार उसमें आने वाली कृत्रिम सामग्री आने और देखने के कारण अस्वाभाविक व्यवहार ,असंतोष और समाज तथा परिवार के सदस्यों के प्रति आक्रोशित तथा असहिष्णु बना सकता है । बच्चों के अपने भीतर दबे अतृप्त कुण्ठा व्यक्त करने का जरिया बन रहा है इंटरनेट । ऑन लाइन कक्षा के नाम पर अभिभावक की आँख में धूल झाेंक कर गेम खेलने में व्यस्त होने तथा चैट करने और अन्य साइट देखने जैसी गतिविधियाँ करने की शिकायत भी सुनने को मिल रही हंै । लगातार कक्षा चलाने के कारण भी कई बच्चों का पढ़ाई के प्रति विरक्ति भी देखने की बात अभिभावक अनुभव कर रहे हंैं । पढाÞई एक मानसिक प्रक्रिया है इसके लिए विद्यार्थी को मानसिक रूप से तैयार होना जरूरी है । शिक्षकाें के एकतरफी पढ़ाने से बच्चों में नई बात सीखने समझने के बजाय पढाÞई से विरक्ति होना स्वाभाविक है । कक्षा में शिक्षक की प्रत्यक्ष निगरानी में पढ़ना सीखते हैं लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई में घर में कंप्यूटर तथा मोबाइल के सामने अकेले बैठा बच्चा पढाÞई के प्रति कितना संवेदनशील होगा सोचनीय विषय है ।
ऑनलाइन पढ़ाई में स्वतंत्रता को स्वछंदता में परिणत करते देर नहीं लगती है । कक्षा १२ में पढ़ने वाला मनीष ऑनलाइन कक्षा लाग ऑन कर अपनी इच्छा अनुसार काम में व्यस्त हो जाता है और शिक्षक के सवाल पूछने पर बिजली चली गई तो कभी इंटरनेट काम नहीं करने का बहाना बनाता है । सवालों का जवाब दूसरे साथियों से नकल कर शिक्षक को दिखाता है । वैसे मनीष अकेला विद्यार्थी नहीं है जो ऐसा करता होगा !

अपनी बातों को अभिव्यक्त न कर पाना, वास्तविकता के बजाय कृत्रिम संसार में मग्न रहना,खाने ,सोने के समय भी घंटों मोबाइल में आँख गडाए रखना आजकल बच्चों में आम बात हो गई है । परिणामतः बच्चों में ईष्र्या ,गुस्सा और असंतोष बढ़ता जा रहा है । इसके दुष्परिणाम के रूप में बच्चों का डिप्रेशन और एन्जाइटी जैसे मानसिक समस्या से ग्रस्त होना कई अध्ययनों में बताया जा रहा है । भारत के कर्नाटक राज्य में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के विषय को लेकर ऑन लाइन कक्षाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है ।
सही भी है कि बच्चों को लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठाए रखना शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से सही नहीं है । शिक्षकों को भी एक तरफा पाठ्यवस्तु न पढ़ाकर खोजपूर्ण तथा अनुसंधानात्मक कार्य को करने की ओर अभिप्रेरित करना चाहिए ।
इस महामारी के समय बाल मनोविज्ञान को ध्यान में रखकर ही ऑन लाइन शिक्षा देने से फायदा हो सकता है ।
