पूरा विश्व कोविड १९ के त्रास में जी रहा है । इसके संक्रमण से बचने के लिए विश्व के अधिकांश देशों में लंबे समय तक लॉकडाउन किया गया । लोगों को अपने घरों से निकलने पर पूरी तरह से रोक लगा हुआ था । नेपाल में भी ढाई महीने तक पूरा देश लॉकडाउन में रहा । अभी भी देश के कई जिलों में कोरोना के बढ़ते मामलाें की वजह से लॉकडाउन की स्थिति कायम है । किसी भी व्यक्ति के लिए उसका घर सबसे ज्यादा सुरक्षित स्थान होता है, जहाँ वह अपने परिवार के साथ हँसी खुशी का जीवन व्यतित करता है । किसी भी प्रकार का संकट आने पर उसका सामना करने का बल परिवार से मिलता है । दुःख और सुख में अपनों के प्रेम और स्नेह के कवच से संरक्षण मिलता है । घर समझदारी और सद्भाव बढ़ाने के साथ–साथ जिम्मेदारी बोध कराने का स्थान भी होता है । व्यक्ति की व्यस्त जीवन शैली और धन कमाने के होड़ में जुटे लोगों के लिए घर और परिवार के प्रेम और सुख से वंचित होने की परिस्थिति में कोरोना ने पारिवारिक दूरी घटाने, एक दूसरे की भावना को समझने
और संबंध मजबूत बनाने का सुनहरा अवसर प्रदान किया है । लेकिन क्या सचमुच व्यक्ति अपने घरों में सुरक्षित रह पाता है ? विशेष कर परिवार की महिला सदस्य ? विश्वभर में तीन सौ करोड़ व्यक्ति लॉकडाउन के दौरान घरों में बंद थे । सड़क सुनसान थी ,बाहर का वातावरण इतना शांत था कि कोसों दूर जंगल के जानवर शहर की गली चौराहों पर मटरगश्ती करने लगे थे ! लेकिन आश्चर्य ! घरों के भीतर अशांति का साम्राज्य पसरा हुआ था । पूरे विश्व में पारिवारिक कलह, महिला हिंसा और तलाक की घटनाओं में कई गुणा वृद्घि विभिन्न तथ्यांको में दर्ज हुई । परिस्थिति कितनी जटिल होती गई कि संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव को अपील जारी करनी पड़ी कि लॉकडाउन काल में प्रत्येक देश की सरकार अपने यहाँ महिलाओं की सुरक्षा पर ध्यान दे । राष्ट्रसंघ के अनुसार लॉकडाउन के दौरान विश्वभर में घरेलू हिंसा में २० प्रतिशत तक वृद्धि हुई है । लॉकडाउन ने सामाजिक दूरी बढ़ने के साथ ही पारिवारिक दूरी घटायी है । इस बीच लोगों ने कतिपय परिवार के साथ बिताने वाले समय का महत्व समझा है तो कतिपय अवस्थाओं में जैसे अभाव की अवस्था में घर–घर में तनाव भी बढ़ा है । संसारभर की महिला परिवार,
समाज और अपराधियों से उत्पीड़न भोग रही है । लॉकडाउन ने परिवार में आर्थिक अभाव बढ़ाया है ,महिला को उसका भी सामना करना पड़ रहा है । उसके साथ ही उनके साथ घरेलू हिंसा ,बलात्कार और हत्या जैसे जघन्य अपराध हो रहे हंै –राष्ट्र संघ के  प्रतिवेदन में कहा गया है ।
यूरोपीयन यूनियन के संसद् ने भी एक विज्ञप्ति जारी कर बढ़ती महिला हिंसा पर चिंता जतलाई । भारत में मार्च से अप्रैल के बीच लॉकडाउन के दौरान ५९ प्रतिशत महिला हिंसा में वृद्घि होने की जानकारी वहाँ के राष्ट्रीय महिला आयोग ने दी है । अमेरिका जैसे विकसित देश में प्रतिदिन दो हजार महिला हिंसाएँ से बचने के लिए पुलिस को फोन कर रही थीं । उसी तरह स्पेन में महिला हिंसा की घटनाओं में १२ प्रतिशत वृद्घि हुई जिसको रोकने के लिए हिंसा पीडि़त

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