मौसमी सिंह (तिवारी)

पिछले कई दिनों के बाद आज तपस्या अपने अंतद्र्वन्द से खुद को बाहर निकाल पाने मे सफल हो पायी थी । वह सीधा अपने पापा के स्टडी कक्ष मे जा पहुँची । पापा भी इस वक्त बेटी को देखकर हैरान रह गए ।
क्या बात है ? बेटा, कोई परेशानी है क्या ? तुम्हारी मम्मी जो कुछ भी बता रही थी वह सही है न ? योगेश अपनी बेटी के आँखों में झाँकते हुए कुछ ढुँढ़ने की कोशिश करने लगे । परंतु वहाँ बचपन की मासूमियत और शरारत के स्थान पर अथाह वेदना का सागर लहराता हुआ देखकर सहम गए । वह अपना केस स्टडी को छोड़ टेबल लौंप ऑफ करके पास के लो बेड़ पर बैठ गए । बेटी के सर पे हाथ फेरते हुए बोले –“तुम टेंशन मत लो बेटा तुम एकलौती संतान हो मेरी । तुम्हारी खुशियों से बढ़कर और कुछ हो हीं नहीं सकता मेरे लिए ! तुम जो चाहोगी वही होगा । तुम्हारी पसन्द हमारे सर–आँखों पर ! इतने सारे केस मैंने सुलझाएँ परन्तु यह अपना घर का मामला था इसलिए उलझ गया ।”
आई.एम. सारी पापा । मैंने आपलोगों को बहुत हार्ट किया, मुझसे भी बहुत सारे एकसपेक्टेशन रहे होंगे । वह मंै समझ हीं नहीं पाई । मैं बहुत सेल्फिस हो गयी थी । अपने स्वार्थ के आगे आपलोगों के मनोभावों को मंै समझ हीं नहीं पाई ।
कोई बात नहीं । तुम तो हमारे प्राण हो । बच्चों से नादानियाँ नहीं होंगे तो हम बुढों से होंगे और ठठाकर हँसने लगे । वातावरण को समान्य और तपस्या का मूड़ बदलने का प्रयास व्यर्थ रहा योगेश का । तपस्या गंभीर मुद्रा में कहीं और खोयी थी ।
पिता असमंजस मे पड़ गये । वह क्या करें क्या नहीं, कुछ समझ मे नहीं ‘आ रहा था ।’ फिर भी वह बेटी को सामान्य करने की चेष्टा नहीं छोड़े ।
मीनू ! अरी ओ मीनू…
कहाँ हो भई । तुम्हारा काम खत्म नहीं हुआ क्या ।
हाँ, बस यह लॉस्ट वाला आँडिट को री–चेक करके अभी आपके पास आती हूँ ।
और सुनो तीन कप कोल्ड काफी भी लेती आना । हम तीनों छत पे साथ पिएँगे ।
जी अच्छा, अभी लाई ।
यंत्रवत् तपस्या मम्मी–पापा के साथ हाथ में क‘ाफी लिए छत पे जा बैठी ।
हाँ–तो पापा के साथ क्या गुफ्तगु चल रही थी । जरा मैं भी तो सुनूँ ।
कुछ खास नहीं । बस हमारी बेटी को नींद नहीं आ रही थी और आज बड़े अच्छे मूड़ मे भी है ।
माँ मेरा वो निर्णय बिल्कुल ही गलत था । मै मयंक से शादी नहीं कर सकती । एक्चुअल में मैं अभी फिलहाल इस फालतु के चक्कर में पड़ना हीं नहीं चाहती । मैं अपना सारा ध्यान अपने कैरिअर के तरफ लगाना चाहती हूँ ।
वो तो ठीक है । पर तुम्हारी पसंद के लड़के से हमें कोई एतराज नहीं । हमें भी वो पसंद है । आखिर हुआ क्या ? पापा और भी अधिक परेशान नजर आने लगे ।


बात यह है पापा । वह अभी शादी के लिए तैयार नहीं है ।
ठीक है । अभी नहीं है तो, कभी तो करेगा ना । मेरा मतलब है, साल, दो या फिर अपनी सुविधा अनुसार भी तो शादी करेगा ना ।
हाँ बेटा, पापा सही कह रहे हैं । तुम–दोनों के बीच कुछ हुआ क्या ?
पापा, मम्मी हम दोनों के बीच अब ऐसा कुछ भी नहीं रहा ।
मतलब….?
मतलब अब हम सिर्फ दोस्त हैं ।
वो तो पहले से ही हो ।
वो शादी किसी और लड़की के साथ कर रहा है । मम्मी के पसन्द के मुताबिक ।
और तुम ? तुम उन लोगों की पसन्द ना बन पाई । सिर्पm मयंक की पसन्द बनकर रह गई । और अब अन्त में वह भी तुम्हारे साथ चार साल गुजारने के बाद तुम्हें समझ न पाया । कैसे हो तुमलोग न्यू जेनरेशन के ।
आधुनिकता के नाम पर किसी की भी नहीं सुनते । मनमानी करते हो । अपनी इच्छा अनुसार जीवन की परिभाषा बदलते हो । अब भुगतो ।
बस भी करो मीनू । वह पहले से ही दुखी और टूट चुकी है । उसकी हालत तो देखो । हमारी चुलबुली–सी गुडि़या बिल्कुल पत्थर सी बन गई है । ऐसे वक्त पर हम अपनी बेटी को सपोर्ट नहीं करेंगे तो और कौन करेगा ।
हाँ यह तो है । वो जैसी भी है, हमारी सन्तान है ।
तो तुम्हारी क्या इच्छा है ।
मेरी तो कोई भी इच्छा शेष ही. नहीं रही । मैं शायद अब उसे कभी भूल भी नहीं पाऊँगी ।
कब प्यार हो गया । मम्मा पता हीं नही. चला । माँ के गले से लग के फफककर रोने लगी ।
मैने तो कभी और किसी से प्यार के बारे मे ये नहीं सुना कि प्यार ने कभी किसी को होने से पूर्व कोई इनफॉरमेशन भेजी हो या फिर मिस क‘ाल । ए तो बस ऐसे हो जाता है और जोर–जोर से ह‘सने लगी । माँ की ठिठोली पर बेटी भी रोना भूलकर हँसने लगी ।
माँ तुम भी ना ।
प्यार और कोरोना दोनों एक जैसे हैं । हर किसी को यह रोग लगने के बाद ही पता चलता है ।
क्या बात कही है तुमने ।
अपने आपको सँभालो । एक मामूली लड़का के पीछे तुम अपने आपको बर्बाद मत करो । तुम्हारा परिवार, अपना कैरिअर तथा प्mयूचर इम्र्पाेटेन्ट है ।
तुम्हारे लिए । वह इमोशनल और गुजरा हुआ कल था । तुम्हारे लायक वह था ही नहीं । उसे अपने दिल से निकाल फेको । तुम्हारा भविष्य तुम्हारे सामने है । तुम्हारे मम्मी–पापा है न तुम्हारे साथ !

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