अभी तक यह कहा जाता रहा है कि मधुमेह रोगियों को कोरोना होने का खतरा ज्यादा है लेकिन अब खबर आ रही है कि कोरोना वायरस संक्रमित को निमोनिया के साथ ही साथ मधुमेह से भी
पीडि़त बना रहा है ।
कोविड १९ के संक्रमण से पीडि़त व्यक्ति के स्वस्थ होने के बाद अन्य कोई दीर्घरोग न देखने के बाद भी डॉक्टर कुछ मरीजों में मधुमेह रोग के विकास को दर्ज किए हैं ।
इस संबंध में किए गए दो अध्ययनों में मधुमेह से बचाने वाले शरीर के कोष को कोरोना वायरस द्वारा नष्ट करते हुए पाया गया है ।
कोरोना संक्रमण होने के बाद टाइप १ मधुमेह शरीर में आवश्यक मात्रा में इंसुलिन का उत्पादन नहीं करता है और टाइप–२ शरीर में पर्याप्त इंसुलिन रहने पर भी ठीक से कार्य नहीं करता ।
इंसुलिन शरीर के कोष को खून के सही मात्रा प्रवाह करने में मदद करता है । इंसुलिन के उत्पादन घटने से या अवरोध उत्पन्न होने पर खून में चीनी और ग्लूकोज की मात्रा अत्यधिक होने लगता है । ग्लूकोज का अत्यधिक मात्रा ही मधुमेह का प्रमुख कारक तत्व होता है । ग्लूकोज के अत्यधिक मात्रा को हाइपरलाइसेमिया भी कहा जाता है । अमेरिका में कुल मृत्यु के १० से १५ प्रतिशत हिस्सा मधुमेह रोगी का है । सन् २०१७ में ३ करोड़ ४२ लाख अमेरिकी इस रोग से पीडि़त थे । मधुमेह के कुल रोगी में से १६ लाख को टाईप १ मधुमेह होता है । इस रोग के अंतर्गत अग्नयासय (प्याडक्रियाज)में रहे का इन्सुलिन उत्पादन गरने वाला बोटा कोष नष्ट हुआ और इंसुलिन उत्पादन प्रभावित होने लगता है ।
कोविड–१९ से मृत्यु हुए रोगी के शव परीक्षण(अटोप्टी) के माध्यम से अध्ययन में अग्न्यासय में रहे बेटा सेल को वायरस से नष्ट करने का क्षमता रखने और इससे इन्सुलिन के उत्पादन प्रभावित होने से टाइप–१ मधुमेह होना दिखाता है । अग्न्यास के कोष में हुए क्षति को रोकने से कोविड १९ से ठीक हुए बीमारी से मधुमेह रोग का उपचार के लिए इंसुलिन आदि अन्य उपचार विधि पर निर्भर होना होता है । इसलिए कोविड १९ से ठीक होने वाले रोगी को मधुमेह रोग को लक्षण है कि नहीं देखना चाहिए । अत्यधिक प्यास लगना ,लगातार पेशाब लगना,वजन घटना तथा थकान होने जैसा लक्षण देखने पर सावधान होना चाहिए ।

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