वो शक्ल सूरत से कैसा था, बताने में असमर्थ हूँ। पर हाँ, उसके हावभावों से ये पूर्णतया स्पष्ट था कि वह काफी उदास और चिंतित था

मैंने इंसानियत के नाते पूछ लिया, क्या बात है . बहुत उदास दिखाई देते हो। कुछ मदद चाहिए क्या .

हाँ, मैं उसके लिए काफी चिंतित हूँ। जाने उसपर क्या बीती होगी जाने कैसी होगी उसने एक लम्बी ठँडी आह भरते हुए कहा

वो वो कौन

वो जिससे मेरी शादी होने वाली थी वो मुझसे बहुत प्यार करती थी और मैं भी उसे जीजान से चाहता था वो अपनी कहानी सुनाने लगा और मैं भी उसकी प्रेम कहानी में दिलचस्पी लेने लगा

फिर क्या हुआ मैं उसकी कहानी आगे सुनने को उत्सुक था

फिर क्या..उसके घर वाले नहीं माने, लेकिन हम एकदूसरे के बिना नहीं रह सकते थे एक दिन सुना कि उसके घरवालों ने जबरन उसकी शादी कहीं और तय कर दी

फिर

मैंने उसे मिलने की बहुत कोशिशें की पर

पर क्या मैंने पूछा

पर मैं उसे मिल नहीं सका, उसने गहरी साँस छोडते हुए कहा, और मैंने आत्महत्या कर ली

आत्महत्या पर तुम तो

अब मैं जीवित व्यक्ति नहीं हूँ

क्क्या..! मेरी उत्सुकता डर में बदल गई।

डरो मत, मैं तुम्हें कोई नुकÞसान नहीं पहुँचाऊंगा। बस तुम मेरी थोड़ीसी सहायता कर दो

हाँ, कहो ! मैंने राहत की साँस ली

मैं उससे बहुत प्यार करता हूँ उसकी चाहत ही मुझे इस रूप में भी यहाँ खींच लाई है मैं सिर्फ जानना चाहता हूँ कि वो ठीक तो है ! कहीं मेरे मरने की खबर सुनकर उसने भी..और मेरे माँबापक्या तुम मेरी मदद करोगे ?

परंतु, यह काम तुम मुझे क्यों कह रहे हो ? तुम स्वयं क्यों नहीं देख आते सब ?

‘‘अरे, आज इतनी देर तक सो रहा है! उठ चायनाश्ता तैयार है।’’ रसोई घर से माँ के तीखे स्वर ने मेरी नींद खोल दी

ओह, आया माँ ! 

मुझे उस दूसरी दुनिया के उस प्राणी से अपनी बातचीत अधूरी रह जाने का खेद था मुझसे उस दूसरी दुनिया के आदमी की मदद की गुहार का कारण स्पष्ट था

काश ! माँ ने १० मिनट बाद आवाज लगाई होती! कम से कम उसे इतना तो बता देता कि––‘हे भाई, बेवजह परेशान हो रहे हो। यहाँ सब कुशल ही होंगे तुम्हारे माँबाप भी ठीकठाक होंगे और तुम्हारी वोवो भी तुम्हें भूल चुकी होगी जानते नहीं, शादी के बाद मनुष्य का एक तरह से पुनर्जन्म होता है––एक नए जीवन की शुरूआत। और वैसे भी हम धरती के लोग मरे हुओं को याद करना अपशकुन मानते हैं और, भूल से भी कहीं अपने घर या उसके घर ना जा पहुँचना जिनके लिए तुम इतने उदास और चिंतित हो, वोभूतभूत चिल्लाएंगे, तुम्हें देखकर और दूर भागेंगे तुमसे

अरे भईया, इस धरती के लोग यहीं के लोगों से प्यार निभा लें तो काफी है ! तुम तो बहुत दूर जा चुके हो पर मुझे खेद है कि यह सब मैं उसे नहीं कह पाया।

रोहित कुमार हैप्पी

संपादक, भारतदर्शन