प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने पदभार ग्रहण करने के साथ ही सार्वजनिक तौर पर शपथ खाए थे कि मैं देश में भ्रष्टाचार नहीं करुँगा और न करने दूँगा । लेकिन आज तीन वर्ष पूरा होने को है प्रधानमंत्री केपी शर्मा के कार्यकाल में ही नेपाल भ्रष्ट देशों की सूची पहले की तुलना में चार अंक और नीचे पहुँच गया है अर्थात् पिछले वर्ष नेपाल विश्व के भ्रष्ट देशों की सूची में जहाँ ११३ वें स्थान पर था वहीं इसबार ११७ वें स्थान पर पहुँच गया है । ट्रान्सपरेन्सी इन्टरनेशनल ने भ्रष्टाचार अवधारणा सूचकांक सार्वजनिक किया है जिसमें १८० देशों में किए गए सर्वेक्षण को दिखाया गया है । इस वर्ष के सूचकांक अनुसार न्यूजीलैंड ८८ अंक प्राप्त कर सबसे कम भ्रष्टाचार होनेवाला देश बना है । वही १२ अंक प्राप्त कर सोमालिया सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार होनेवाला देश के रूप में सूचीकृत हुआ है । दक्षिण एशियाई देशों में सबसे कम भ्रष्टाचार वाला देश भूटान है और सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार करने वाला देश अफगानिस्तान है । सूचकांक में भूटान में ६८ अंक मिला और वह २४ वें स्थान पर है । भारत ४० अंक सहित ८६ वें, पाकिस्तान ३१ अंक सहित १२४ वें, बंगलादेश २६ अंक सहित १४६ वें और चीन ४२ अंक सहित ७८ स्थान पर है ।
सूचकांक में १०० अंक अति स्वच्छ और शून्य अंक अति भ्रष्ट का प्रतीक है । सन् १९९५ से ट्रान्सपरेन्सी इंटरनेशनल प्रत्येक वर्ष ऐसी सूचकांक सार्वजनिक करता आ रहा है । नेपाल का सन् २००४ से इसमें समावेश हुआ ।
ट्रान्सपरेन्सी इन्टरनेशनल नेपाल के अनुसार नेपाल में भ्रष्टाचार बढ़ने के प्रमुख कारणों में सरकार का भ्रष्टाचार विरोधी प्रयास व्यवहार में पर्याप्त न होना, सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार और अधिकार का दुरुपयोग होना, सार्वजनिक पदाधिकारियों पर कार्वाही कम होना, व्यापार, व्यवसाय में घूसखोरी कायम रहना, सूचना में नागरिकों की पहुँच में कमी जैसी समस्याएँ हैं । इन्हीं के आधार पर विश्व बैंक, वल्र्ड इकोनोमिक फोरम और वल्र्ड जस्टिस प्रोजेक्ट आदि ने सर्वेक्षण में नेपाल को कम अंक दिया ।
