भारत के पूर्व अतिरिक्त सचिव एस रमेश ने भारत को अपने पूर्व डॉक्ट्रिन में लौटते हुए नेपाल में संवैधानिक राजतंत्र तथा 2047 साल के संविधान की पुनर्स्थापना की दिशा में क्रियाशील होने का सुझाव दिया है। नेपाल में चीन के प्रभाव को चेक करने के लिए प्रधानमंत्री केपी ओली के विकल्प को खोजने से भारत को अब नए विकल्प की खोज करनी चाहिए, उनका कहना है। इसके लिए उसने अफगानिस्तान के राजा जाकिर शाह और कम्बोडिया के नोरोडोम सिंहानुक का उदहारण भी पेश किया है।
‘टेलीग्राफ इण्डिया डॉट कम’ में प्रकाशित लेख में उन्होंने इसके लिए नेपाल का राजपरिवार भारत पर निर्भर कर सकता है, ये प्रमुख प्रश्न है का जिक्र भी किया है। चूँकि पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र इस समय नागरिक का जीवन बिता रहे है तथा पूर्व युवराज पारस को जनता राजा के रूप में स्वीकार नहीं कर सकती। उनके विचार में इसके लिए पारस पुत्र हृदयेंद्र जिन्हे पहले गिरिजा प्रसाद कोइराला ने भी बेबी किंग के रूप में आगे बढ़ाया था उपयुक्त पात्र हो सकते हैं। हृदयेंद्र 18 वर्ष के हो चुके हैं तथा भारतीय राज परिवार के साथ भी सम्बन्ध रहे होने के कारण वे नेपाल में राजतन्त्र की पुनर्स्थापना के लिए उपयुक्त पात्र हो सकते हैं।
पूर्व राजा ज्ञानेंद्र को सत्ताच्युत करने भारत के पूर्व अतिरिक्त सचिव एस रमेश ने भारत को अपने पूर्व डॉक्ट्रिन में लौटते हुए नेपाल में संवैधानिक राजतंत्र तथा 2047 साल के संविधान की पुनर्स्थापना की दिशा में क्रियाशील होने का सुझाव दिया है। नेपाल में चीन के प्रभाव को चेक करने के लिए प्रधानमंत्री केपी ओली के विकल्प को खोजने से भारत को अब नए विकल्प की खोज करनी चाहिए, उनका कहना है। इसके लिए उसने अफगानिस्तान के राजा जाकिर शाह और कम्बोडिया के नोरोडोम सिंहानुक का उदहारण भी पेश किया है।
उनके विचार में इसके लिए पारस पुत्र हृदयेंद्र जिन्हे पहले गिरिजा प्रसाद कोइराला ने भी बेबी किंग के रूप में आगे बढ़ाया था उपयुक्त पात्र हो सकते हैं। हृदयेंद्र 18 वर्ष के हो चुके हैं तथा भारतीय राज परिवार के साथ भी सम्बन्ध रहे होने के कारण वे नेपाल में राजतन्त्र की पुनर्स्थापना के लिए उपयुक्त पात्र हो सकते हैं। के लिए करण सिंह के नेपाल जाने का स्मरण करते हुए उन्होंने सिंह को पुनः काठमांडू भेजे जाने का समय आ गया है, उनका कहना है।
