१७ वर्षीय रितेश का आजकल ज्यादा से ज्यादा समय पब्जी खेलने में व्यतीत होता है । रात के २ बजे तक वह अपने दोस्तों के साथ पब्जी खेलता रहता है । जब उसके अभिभावक पब्जी ज्यादा न खेलने की हिदायत देते हैं तो उसका जवाब होता है, मेरे सभी दोस्त पब्जी ही खेलते हंै । वैसे भी कोरोना के कारण जब बाहर खेलने नहीं जा सकता हूँ तो मन बहलाने के लिए पब्जी न खेलंू तो क्या करूँ ! युवा पुश्ता में लोकप्रिय ई गेम की वजह से करोड़ों धन राशि देश से बाहर चली जा रही है । नेपाल में पब्जी के अलावा फिफा,डोटा,काउन्टर स्ट्राइक आदि खेल युवाओं में विशेष लोकप्रिय हंै । काठमांडू घाटी सहित देश के प्रमुख शहरों पोखरा ,हेटौडा,धरान नेपालगंज और विराटनगर आदि स्थानों की बड़ी संख्या में युवा ई गेम में सहभागी होते हैं । जहाँ विश्व में ऐसे खेलों में अरबों रुपए की लगानी हो रही है वहीं नेपाल में एक वर्ष में एक लाख से ज्यादा रुपए व्यय करने वाले भी हंै । वैसे औसतन एक नेपाली का एक सौ डॉलर अर्थात् १२ हजार रुपया व्यय करने का अनुमान है ।
रकम कैसे बाहर जाता है ?

फीस लगनेवाला खेल डाउन लोड करना,खेल के चरित्र को सामग्रियों से सुसज्जित करने के लिए देश के भीतर ही पे पल ,स्टिम वालेट या डॉलर वाले क्रेडिट कार्ड प्रयोगकत्र्ता का सहारा लेते हैं खिलाड़ी ।विदेश में रहे साथियों के माध्यम से भी खिलाड़ी गेम और गेम के चरित्रों के लिए सामग्री खरीदते हैं । वर्ष में तीन से लेकर छह महीना तक ऐसे गेम होते हैं । इसको आधार माना जाए तो वार्षिक लगभग १२ करोड़ रुपए ऐसे खेलों के माध्यम से विदेशों में जाता है । १४ –२८ वर्ष के युवक ऐसे खेलों में विशेष रूप से सक्रिय पाए जाते हैं ।
