अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् की स्थापना किन उद्देश्यों को लेकर
की गई ?
जिस प्रकार से आजादी के आंदोलनों में विद्यार्थियों की भूमिका
सक्रिय थी उतनी ही भूमिका इस देश को आगे बढ़ाने में, तरक्की
में इस देश की समस्याओं को सुलझाने में होगी और होनी चाहिये
और ऐसे अवसर विद्यार्थियों को उपलब्ध होना चाहिए । एक व्यापक
राष्ट्रीय पुर्ननिर्माण का उद्देश्य लेकर विद्यार्थी परिषद् की स्थापना
हुई । जो स्थापना काल से व्यापक लक्ष्य को लेकर संगठन का निरंतर
कार्य कर रहा है । अपने लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रहा है ।
स्थापना काल में क्या—क्या चुनौतियाँ रही है ? यह किस प्रकार से
सामना करते हुए यह संगठन आगे बढ़ रहा है ।
देखिये जब देश में संगठन की स्थापना हुई तो निश्चित रूप से
कुछ लोग सोचते थे कि विद्यार्थियों की भूमिका क्या रहेगी ? आजादी
मिल गई । विद्याथियों की भूमिका समाप्त हो गई । ऐसा मानने
वाले बहुत लोग थे । कुछ लोग की यह भी सोच थी कि राजनीतिज्ञ
दलों के पिछलग्गू या उनका विंग बनकर विद्यार्थी कार्य करे । वही
वामपंथी संगठन थे जो हिंस्रक रास्ते से देश के आत्मा के विरोध में
विद्यर्थियों को ले जाना चाहते थे । उस समय विद्यार्थी परिषद् ने यह
भूमिका रखी कि आज का विद्यार्थी कल का नागरिक है । विशेषकर
विश्वविद्यालयाें या उच्च शिक्षा से जो विद्यार्थी आया है । इसलिये
उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है । जिसे निभानी है । साथ ही विद्यार्थी
परिषद् ने नारा दिया छात्र शक्ति राष्ट्र शक्ति है । एक सशक्त लोकतंत्र
की भागीदारी सबके सामने रखी और उसी आधार पर लगातार

अपने स्थापना काल से एक तरफ कॉलेजों के रोजमर्रा के शिक्षा से
जुड़े परिसर के मुद्दे को उठाया साथ ही देश के सामने जो राष्ट्रीय
चुनौतीयाँ ,राष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्रीय आर्थिक तरक्की के मुद्दों को भी
अनछुआ नहीं रखा ।
उनकाें भी अपने भूमिका का महत्वपूर्ण हिस्सा माना । इसलिये
विद्यार्थी परिषद् ने एक व्यापक संदर्भ में विद्यार्थी आंदोलन के उद्देश्यों
को ध्यान में रखकर अपने कार्य को आगे बढ़ाया । बहुत सारे
चुनौतीयाँ सामने आई । हमारा देश विकास से बहुत दूर था लेकिन
आज निश्चित रूप से जो यात्रा चली थी यह यात्रा ने सबको छुआ
है । इस यात्रा के माध्यम से शहर,गांव,पहाड़, सभी जाति, समुदाय,
छात्र, छात्राएं सभी तरह के पाठ्यक्रम आदि को बड़े मजबूती से
छुआ है । आज वास्तव में एक विद्यार्थी आंदोलन जिसकी लोकतंत्र में
महत्वपूर्ण भूमिका होती है । उसको सृजन करने में विद्यार्थी परिषद्
ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई है । आज देश को लोकतांत्रिक माध्यम
से विकास के रास्ते ले जाने वाला अपने देश की मिट्टी से जुड़ा हुआ
मजबूत एक संगठन मिला है ।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् का लक्ष्य ज्ञान, शील, एकता है ।
इसका मूल आशय क्या है ?
वास्तव में कहा जाय तो ज्ञान का मतलब मूल अर्थों में बातों को
जानना है । जिसमें हम अपने देश की संस्कृति, इतिहास और अपने
देश के लोगाें में आपसी एक रिश्ता है कि आपस में सभी शांति से
रह सकते है । एक दूसरे की सहायता कर सकते हंै । परस्पर पूरक
बन सकते हैं । भले देखने में अलग—अलग हो सकते हंै फिर भी

परिषद् से जुडाव

Þ

होना मेरा
सौभाग्य है
सुनील अम्बेकर

अन्तर्वार्ता

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् भारतीय छात्र संगठन है । इसकी स्थापना ९ जुलाई, १९४९ को की गयी । विद्यार्थी परिषद् का नारा है— ज्ञान,
शील और एकता । आज विद्यार्थी परिषद् न केवल भारत का बल्कि विश्व का सबसे बडा छात्र—संगठन है. महान सांस्कृतिक,सामाजिक,चिंतक Þ
श्री सुनील अम्बेकर जी जिन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित किया है । आप अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के राष्ट्रीय
संगठन मंत्री हैं । आपके कुशल मार्गदर्शन में संगठन निरतंर आगे बढ रहा है । आपका जन्म २६ दिसम्बर १९६७ नागपुर में हुआ है । आप उच्च Þ
व्यक्तित्व के धनी हैं । भारतीय राष्ट्रवाद और छात्र राजनीति पर आपका गहरा अध्ययन है । सुनील अम्बेकर नागपुर के विदर्भ क्षेत्र महाराष्ट्र
से हैं । इन्होने जीव विज्ञान के कोशिका विज्ञान में विशेषज्ञता के साथ विज्ञान में स्नातकोत्तर किया है । अम्बेकर ने संगठन का नेतृत्व आयोजन
सचिव के रूप में बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ, तथा एबीवीपी के आयोजन सचिव और यूथ अगेंस्ट भ्रष्टाचार के सलाहकार सदस्य होने के नाते
भ्रष्टाचार के विरोध आंदोलन किया ।
विश्व के सबसे बडे छात्र—संगठन भारतीय विद्यार्थी परिषद् के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुनील अम्बेकर जी से बिमलेश कुमार पाण्डेय की Þ
विशेष बातचीत का प्रस्तुत है अंश—

ज्ञड क्ष् द पब्लिक, कार्तिक २०७७
राजनीति÷विचार अन्तर्वार्ता दृष्टिकोण
हमारी संस्कृति एक है । मूल बात है कि अपने देश की विशेषता रही
है कि हजारों वर्षों जिसने अपने भारत को मजबूत बनाया और पूरी
दुनियां के लिए उसको एक विश्वास एवं मार्गदर्शक का केन्द्र बनाया ।
वास्तव में आज के विद्यार्थी को उन सारी ज्ञानों को प्राप्त करने की
जरूरत है । शिक्षा केवल धन अर्जित करने के लिए नहीं होती है ।
शिक्षा वास्तव में मनुष्य को अच्छा चरित्रवान व्यक्ति भी बनाती है ।
इस माध्यम से विद्यार्थी जीवन में चरित्र का बड़ा ही महत्व है । जब
युवाओं की भूमिका जो ज्ञान से सृजित हो, चरित्र से सम्पन्न हो
और ऐसे देश की युवा सज्जन शक्ति हैं तो ऐसे लोगों की वास्तव
में भारत को आवश्यकता है जो निश्चित रूप से भारत की प्रगति
को,भारत के विकास को एक महान स्थिति में पहुँचने से कोई नहीं
रोक सकता । इस अर्थ में विद्यार्थी को सामने रखकर विद्यार्थी परिषद्
ने इन बातों को अपने कार्य का आधार बनाया । आज जहाँ राजनीति
रंग में रंगे हुए या केवल अपने अलग—अलग प्रकार की धनबल,
बाहुबल से गठित विद्यार्थी संगठन देखने को मिलते हैं । वही विद्यार्थी
परिषद् ने अपने—आप को ज्ञान, शील, एकता के आधार पर युवाओं
एवं विद्यार्थियों का संगठन बनाने में सफलता पाई है ।
शिक्षा क्या है ? यह सफल नागरिक बनाने में किस प्रकार से भूमिका
निभा रही है ? इस पर विद्यार्थी परिषद् क्या मत है ?
वास्तव में शिक्षा की भूमिका केवल किसी जानकारी,कुशल गुण
आदि को अर्जित कर यही तक शिक्षा की भूमिका समिति नहीं होती
है । मूल रूप से सम्पूर्ण व्यक्तित्व का निर्माण हो ये शिक्षा की मूल
भूमिका है । लेकिन आज हमारे शिक्षा में इस तरह के बातों का
अभाव होने के कारण एक सम्पूर्ण व्यक्तित्व का निर्माण नहीं हो पा
रही है । इसलिये मूल रूप में शिक्षा में परिवर्तन लाने की जरूरत
है । एक सम्पूर्ण व्यक्तित्व का निर्माण होने से अपने देश, समाज के
बारे में बढि़या कार्य के तरफ ले जाने का कार्य करता है । साथ ही
सच्चाई, हिम्मत से परिस्थितियों का सामना करने के लिये भ्रष्टाचार
से मुक्त होने के लिये मानक गुणों की जरूरत है । एक विद्यार्थी के
मन में शिक्षा के माध्यम से यह सम्मान का भाव जागृत होगा । तभी
समस्याओं का समाधान होगा । ऐसे गुणों का सृजन बालक के जन्म
के साथ ही प्राथमिक शिक्षा से समाहित होना चाहिए ।
शिक्षा केवल पुस्तक तक सीमित नहीं है । शिक्षा का मतलब
मानवीय संबंध, शिक्षक, छात्र,शिक्षा का परिसर, वातावरण, छात्रवासों
का माहौल, रचनात्मक गतिविधि, प्रवेश,परीक्षा, परिणाम आदि भी
महत्वपूर्ण होती है । लेकिन अभी जो दिशा बनी है वह केवल परीक्षा
के लिए, नौकरी के लिये शिक्षा जरूरी है । उतना मतलब समझ लेना
उसमें अपना कुशलता पा लेना है जो शिक्षा के अर्थ को ही बदल
दिया है । इससे बाहर निकलने की जरूरत है । शिक्षा के माध्यम
से सफल नागरिकों का निर्माण हो जो सामाजिक जीवन,चरित्रपूर्ण
जीवन, दूरदर्शी सोच प्रदान करे वही शिक्षा है । इसलिये सर्वगुण
सम्पन्न नागरिक बनाने के दिशा में यह विद्यार्थी परिषद् कैम्पसों
में सामाजिक, रचनात्मक, गतिविधि, कार्यक्रम, उपक्रम आदि का
आयोजन कर यह अवसर प्रदान करता रहता है । जिसके माध्यम से
सम्पूर्ण व्यक्तिव का विकास हो । साथ ही शिक्षा में भारतीयकरण हो
और भारतीय चिंतन के आधार पर शिक्षा बने, इसके लिए संगठन
लगातार प्रयासरत है ।
वर्तमान में विश्वविद्यालय सिस्टम को लेकर विद्यार्थी परिषद् का क्या
रणनीति है ?
रणनीति यह है कि विश्वविद्यालयों में शिक्षा का माहौल बने ।
शिक्षक पढ़ाये और छात्र पढ़े । क्योंकि जो संबंधित कॉलेज हैं उसकी

स्थिति बहुत खराब है । कॉलेजाें के अपेक्षा विश्वविद्यालयों में शिक्षा
का माहौल कुछ अच्छा है । लेकिन प्रवेश, परीक्षा, परिणाम, होस्टल,
शिक्षकों की नियुक्ति वेसिक जरूरतों का अभाव है । सारे रोजमर्रा
की समस्या हैं । विश्वविद्यालयों की शिक्षापरख बनना है तो इसलिये
सरकार को शिक्षा पर जीडीपी का ६५व्यय करने की जरूरत है ।
वर्तमान में तो लगभग आधा ही खर्च हो पा रहा है । साथ ही समाज
से औद्योगिक प्रतिष्ठान, पूर्व विद्यर्थियों से भी धन इकट्ठा करें ताकि
विश्वविद्यालय अपने अनुसार प्रगति कर सके ।
विश्वविद्यालय के स्तर पर नए सिलेसब, नए—नए कोर्स शुरू हो
ताकि विद्यार्थी अपने संपूर्ण कौशल और प्रतिभा को निखार सके । साथ
ही विद्यार्थियों का समाज से परिचय हो,अनुभव हो ताकि सामाजिक
अनुभूति जैसा कई कार्यक्रम की जरूरत है । विद्यार्थी परिषद् उन सभी
समस्याओं को लेकर सघर्षरत है कि कैसे सुविधाओं को ठीक किया जाए
और व्यवस्थायें बेहतर बने, विद्याथी समाज के किसी वर्ग से आते हो
सबके साथ न्यायपूर्ण सुविधाजनक व्यवस्थायें बने । इस बात का भी
विशेष जोर है कि विश्वविद्यालय में सिलेबस कोर्स एक तरफ आधुनिक
एवं मूलभूत भी हो । साथ ही भारत केन्द्रित तथा विद्यार्थी केंद्रित शिक्षा
होनी चाहिये । इस माध्यम से विश्वविद्यालयों में बदलाव होनी चाहिए ।
इस संदर्भ में लगतार संगठन विद्यार्थियों के हर मूलभूत समस्याआें को
लेकर कैंपस में विद्याथियों के साथ कंधा में कंधा मिलकर कार्य करती
है । साथ ही छात्र संघाें के माध्यम एक व्यापक स्तर पर प्रतिनिधित्व
करते हुए निश्चित रूप से बदलाव के लिए सक्रिय है ।
परिषद् से आपका जुड़ाव कैसे हुआ ? आप सफल व्यक्तिव के रूप में
कैसे स्थापित हुए ? आपने बारे में बताए ।
मेरा परिषद् से जुड़ाव होना ये स्वयं के लिये सौभाग्य समझता हूं
मुझे एक अच्छा सामाजिक कार्य करने का मौका प्रदान किया । साथ
ही मेरे जैसे हजाराें लोगों को अवसर प्रदान करती है । मेरे जैसा व्यक्ति
सामान्य परिवार से आया, जिसका कोई परिवारिक विशेष पृष्ठभूमि
नही है । लेकिन जब परिषद् का सानिध्य मिलता है तो हमारे अन्दर
काम करने का जज्बा तैयार होता है । यही कारण है कि विद्यार्थी
परिषद् के साथ जुड़कर सच्चे, अच्छे भाव से देश और समाज के लिए
कुछ न कुछ कर अपने जीवन को सार्थक बना सकते हंै ।
परिषद् के शाखा, सदस्यता,कार्यविस्तार आदि के बारे में बताए ?
लगभग ३० लाख के आसपास हमारी हर साल सदस्यता
होती है । विश्वविद्यालय, कॉलेज के सत्र के शुरूआत में परिषद् के
कार्यकर्ता विद्यार्थीओं को सदस्यता ग्रहण करवाते हैं । लगभग ६०००
से अधिक स्थानों पर परिषद् का कार्य चल रहा है । आज क्ष्त्क्ष् से क्ष्क्ष्त्
तक यह संगठन का कार्य पहुँचा है । लगभग सभी विश्वविद्यालयों
एवं जिलों में,समाज के हर वर्गो, समुदायों, आर्थिक रूप से पिछड़े,
गांव, शहरों समेत सभी जगहों पर व्यापक स्तर पर अखिल भारतीय
विद्यार्थी परिषद् का राष्ट्रीय पुनर्निर्माण का कार्य चल रहा है

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