जिंदगी में कुछ मिनट योग के लिए निकालकर अनेक बीमारियों को दूर किया जा सकता है। शारीरिक– मानसिक–मनोवैज्ञानिक विकारों को दूर करनेवाले ऐसे ही कुछ उपयोगी आसनों से आपको रूबरू कराएंगे स्वामी रामदेव–

अनुलोम–विलोम

लाभ– इस प्राणायाम से बेहत्तर करोड़, बहत्तर लाख, दस हजार, दो सौ, दस नाडि़याँ परिशुद्ध हो जाती हैं । सम्पूर्ण नाडि़यों की शुद्धि होने से देह पूर्ण स्वस्थ, कान्तिमय एवं बलिष्ठ हो जाती है । इस प्रकार यह मधुमेह में भी लाभकारी है ।

विधि– पद्मासन लगाकर बैठ जाइये,अपनी तर्जनी तथा मध्यमा अंगुली को हथेली की ओर मोडेÞ । अब अंगूठा दाहिनी तथा अनामिका और कनिष्ठिका बायें नथुने की ओर रहेगी । अंगूठे से दाहिने नथुने को बन्द रखते हुए बायें नथुने से श्वांस अन्दर लें । अब बायां नथुना अनामिका और कनिष्ठा से बन्द रखते हुए दाहिने नथुने से (अंगूठां ऊपर उठाते हुए) श्वास धीरे–धीरे जितने समय तक श्वास अन्दर लिया हो उससे दो गुणे समय में अर्थात् १–२ के अनुपात से बाहर छोड़ दें । श्वास बाहर निकल जाने के पश्चात उसी दाहिने नथुने से श्वांस लें (दीर्घ) अब दाहिना नथुना अंगूठे से बन्द रखते हुए बायें नथुने से (अनामिका) और कनिष्ठा को ऊपर उठाते हुए श्वास पूर्वोक्त विधि से बाहर निकाल दें । सरल अनुलोम– विलोम का यह एक क्रम पूर्ण हुआ ।

मण्डूक आसन

लाभ– यह आसन पैंक्रियाज को एक्टिव करता है । जिससे इन्सुलिन सही मात्रा में सिक्रेट होता है और आसन मधुमेह में शूगर लेवल को कन्ट्रोल करने में लाभकारी है ।

विधि–दोनों पैर मिली हुई अवस्था में सामने फैलाकर बैठ जायें । हाथ बगल में हथेलियां जमीन पर अंगुलियां हाथ के सामने मिली हुई अवस्था में रहेगी । दाहिना पैर घुटने से मोड़कर दाहिने नितम्ब के नीचे लें आइये । पैर के पंजे अन्दर की ओर रहेंगे, अब बायां पैर मोड़कर उसी प्रकार बायीं ओर बायां नितम्ब के नीचे ले आइये ।
अब इसी प्रकार से मुट्ठी बन्द करके दोनों जंघाओं पर रखें और फिर सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें । और ठोड़ी को जमीन से अपनी क्षमतानुसार लगाएं । इस स्थिति में १५–२० सैकेण्ड तक रुकें, फिर वापस आ जाएं । इसी प्रकार से मण्डूक आसन की दूसरी विधि में दायीं हथेली को नाभि पर रखें, उसके ऊपर बायीं हथेली को रखें और कमर को सीधा रखते हुए आगे की ओर झुके । और अपनी क्षमतानुसार ठोड़ी को आगे की ओर लगाने का प्रयास करें । इस स्थिति में १५–२० सैकेण्ड तक रुकें ।

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