मूल ः लक्ष्मी माली
अनु ः गोपाल अश्क

 

नानाजी तुम्हें बेटी कहते हैं
मामाजी दीदी कहते हैं
पिताजी तुम्हें पत्नी कहते हैं
और मैं मांं कहती हूं ।
मां ! तुम्हारा नाम क्या है ?
मैं विद्यालय गई,
मैं महाविद्यालय गई,
वहाँ तुम्हारे नाम की आवश्यकता नहीं पड़ी,
बहुतों के सामने मैंने अपना परिचय रखा,
लेकिन
किसी ने भी तुम्हारा नाम नहीं पूछा ।
मैं बालिग हो गई,
वोट देने का अधिकार भी मिला ।
लेकिन मेरे परिचय–पत्र में
तुम्हारा नाम नहीं लिखा गया ।
मुझे नागरिकता मिली,
पिताजी के ही नाम से ।
मुझे नौकरी मिली,
पिताजी के ही नाम से ।
मैं बेनाम मां की बेटी,
कहो न मां ! तुम्हारा नाम क्या है ?
किसी के द्वारा भी नहीं पूछे गये,
कहीं उच्चारण भी नहीं किए गये,
तुम्हारे नाम को
सार्वजनिक करना चाहती हूं, मैं
‘धरती’ वाला उपनाम नहीं मां,
मुझे तुम्हारा वास्तविक नाम चाहिए
कहो न, मां ! तुम्हारा नाम क्या है ?

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