मानसिक रोगाें को न समझें कलंक
मानसिक रोग कोई अभिशाप नहीं बल्कि दूसरे शारीरिक रोगाें की तरह ही सामान्य बीमारी है, जिसका इलाज भी संभव है । आइए जानें कैसे–
प्राचीन काल से ही मानसिक रोगाें को कलंक माना जाता रहा है । ये माना जाता है कि मानसिक रोग से ग्रस्त व्यक्ति पर किसी आत्मा का साया है या वो निम्न प्रवृत्ति का है और समाज में जीने योग्य नहीं है । फिल्माें और धारावाहिकाें ने भी इस प्रतिगामी मानसिकता को और हवा दी है । फिल्माें में मानसिक रोगियाें और उनके अस्पताल को निहायत ही गलत तरीके से दर्शाया जाता है जो तथ्याें से कोसाें दूर होता है । यही कारण है कि मनोरोगियाें को समाज में वह स्थान नहीं मिलता जो मिलना चाहिए । लोग उन्हें ‘पागल’ या ‘सरफिरा’ कह कर बुलाते हैं और हर तरह से उनका और उनके परिवार का तिरस्कार करते हैं ।
क्या होता है मानसिक रोग
वास्तव में मानसिक रोग होना शारीरिक रोग होने की तरह ही सामान्य बात है । सन् २००१ में विश्व स्वास्थय संगठन ने एक रिपोर्ट में खुलासा किया कि विश्व में हर चार में से एक व्यीक्त को अपने जीवन काल में एक बार मनोरोग होने कि संभावना होती है । इसका मतलब हमारे आस–पास के लोगाें में से भी कई
