विश्व की लगभग एक चौथाई जनसंख्या आज भी स्वच्छ पानी के लिए तरस रही है । पिछले वर्ष सन् २०२० में विश्व स्वास्थ्य संगठन और संयुक्त राष्ट्रसंघीय बाल कोष (यूनिसेफ) द्वारा किए गए अध्ययन में कहा गया है कि विश्व के हरेक चार में एक व्यक्ति को शुद्ध और स्वच्छ पीने का पानी का अभाव है । साफ और स्वच्छ पानी के उपयोग न कर पाने की वजह से विभिन्न प्रकार के रोगों के शिकार होने की संभावना बढ़ जाती है ।
कोरोना महामारी से बचने के लिए साफ पानी और साबुन से हाथ धोना अनिवार्य आवश्यकता बताए जाने की स्थिति में स्वच्छ पानी के अभाव में कोरोना वायरस से बचना मुश्किल है । एक तथ्यांक के अनुसार विश्व के हरेक १० व्यक्ति में से तीन व्यक्ति साबुन और पानी से अच्छी तरह से हाथ नहीं
धोते हैं । वैसे पहले की तुलना में आजकल स्वच्छ पानी के प्रयोग करनेवालों की संख्या में वृद्धि होने की जानकारी यूनिसेफ के कार्यकाारी निर्देशक हेनरैत्ता फोर ने दी है । सन् २०१६ से २०२० तक स्वच्छ पानी के प्रयोग करनेवालों की संख्या में ४ प्रतिशत की वृद्धि हुई है । निर्देशक फोर के अनुसार सन् २०१६ में विश्व के सिर्फ ७० प्रतिशत व्यक्ति ही स्वच्छ पानी के प्रयोग करने का तथ्यांक सार्वजिक हुआ था ।

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