काठमांडू। हर साल श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला रक्षा बंधन, जनई पूर्णिमा (ऋषि तर्पण) आज पूरे देश में नए यज्ञोपवीत और रक्षा बंधन के साथ मनाया जा रहा है।

पूर्णिमा के दिन प्रातः काल वैदिक सनातन धर्म के भक्त नदियों, झीलों, तालाबों और तालाबों में जाकर गुरु पुरोहित से रक्षासूत्र बांधते हैं। तराई क्षेत्र में इस दिन बहनें अपने भाइयों को राखी बांधती हैं। ऐसी सामाजिक मान्यता है कि इससे बहनों और भाइयों के बीच प्रेम संबंधों में वृद्धि होगी।
यज्ञोपवीत और डोरो (रक्षासूत्र) को ठीक से धारण करता है, तो उसे नकारात्मक तत्वों से सुरक्षा प्राप्त होगी।वैदिक गुरु परंपरा के अनुसार यज्ञोपवीत अर्थात् जनाई को ब्रह्मसूत्र या ज्ञान का सूत्र भी कहा जाता है। भक्त पशुपतिनाथ मंदिर परिसर, वसंतपुर में अशोकविनायक, वागमती नदी के किनारे और काठमांडू घाटी में सुबह से ही रक्षाबंधन बांधने और नए लोगों के लिए प्रार्थना करने के लिए आते हैं। इस वर्ष सरकार ने शारीरिक दूरी बनाकर सांस्कृतिक उत्सव मनाने का आह्वान किया है, क्योंकि नए संस्करण के साथ कोरोना का खतरा बना हुआ है।

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