बुढापा किसी उम्र की बढी हुई संख्या का नाम नहीं है । यह स्थिति है तन के थकने और मन के उदासीन होने की । अब अगर हम कहें कि तन कब थकता है तो आप कह सकते हैं न कि ऐसा तो २५–३० साल के व्यक्ति के साथ भी होता है । जी हाँ ,यही सच भी है । जब तन की स्फूर्ति ऊर्जा खत्म होने लगे और मन में कुछ नया करने का उत्साह चूकने लगे तो यही बुढापा है । अगर यकीन नहीं आता तो यह 
उदाहरण ही देख लीजिए ।

संजीवनी है नियमित दिनचर्या मनुष्य का शरीर बिल्कुल एक ऐसा गाड़ी की तरह
होता है, जिसे सही देखभाल के साथ चलाया जाए तो बरसोबरस साथ देती है । लापरवाही बरती जाए तो शोरूम से निकालने के बाद ही दुर्घटनाग्रस्त किया जा सकता है । नियमित दिनचर्या में अपनाई जाने वाली कई छोटी–छोटी सावधानियाँ वाकई संजीवनी का काम करती हैं बढ़ती उम्र का थामने में । विशेषज्ञाें की मानें तो शुरू से ही आदत बना लें कि लाख भागदौड़ के बावजूद जितना ज्यादा से ज्यादा
हो सके, सूर्याेदय के समय नियम से टहलेंगे । बेहतर होगा, दिन की शुरुआत रात भर तांबे के बर्तन में रखे गए पानी से करें । फिर वॉक के बाद हल्का आहार लें ।
ठोस आहार दिन में केवल दो बार लें और जुबान के हाथाें गुमराह होने की बजाय दिमाग की बात मानकर तेल, मिर्च–मसाले, मांसाहार, गरिष्ठ भोजन वगैरह से
दूरी बनाए रखें । मैदा भी जितना कम हो सके, उतना ही इस्तेमाल करें । छोड़ सकें । तो क्या कहने ! बाकी के आहार का विकल्प तरल पदार्थ फल, सलाद और सूखे
मेवाें को बनाएँ । यह शरीर को ताकत देते हैं और यह भी बिना अतिरिक्त चर्बी चढ़ाए ।

व्यायाम में है आराम
शरीर का आराम तभी संभव है, जब उसमें कोई कष्ट न हो । नियमित व्यायाम शरीर को रेग्युलर सर्विसिंग का काम करता है । एक अनुशासित दिनचर्या, जिसमें सोने–जागने, खाने–पीने और आराम सभी का समय तय हो, शरीर की जैविक घड़ी को ठीक रखता है । साथ ही नियमित व्यायाम और ध्यान शरीर की स्वाभाविक रोग प्रतिरोधक क्षमता का स्तर इतना बढ़ा देता है कि बीमारियाँ और बढ़ती उम्र दोनाें आपसे डरने लगती हैं । नियमित व्यायाम में जाने माने योग गुरू श्रीसुनील सिंह कुछ विशेष क्रियाआ पर ज्यादा  देते हैं, जिनमें है– नियमित वॉक, ताड़ासन, त्रिकोणासन, भुजंगासन और ओम ध्यान । उनके अनुसार नंगे पाँव १५–२० मिनटसूर्याेदय के समय घास पर की गई वॉक और दूसरे आसन हड्यिाें, फेफड़ाें, आंताें, मेरुदंड, श्वांस, पाचन तंत्र और हृदय सभी पर प्रभावी रहता है । यह किसी भी विशेषज्ञ से सीखकर बड़ी आसानी से खुद किए जा सकते हैं । ओम ध्यान मस्तिष्क की कोशिकाआें को आराम और मजबूती देता है , जो बेहतर याददाश्त के साथ–साथ सकारात्मक विचाराें को भी बढ़ाते हैं । जिंदगी को साल–महीने की संख्याआें के घटने– बढ़ने से मत गिनिए । जब तक आप जिंदगी से नयापन चाहेंगे, हर सुबह की किरण आपके लिए कुछ नया जुटा लाएगी । जरूरत सिर्फ आपके चाहने भर की ही है । तो क्या अब भी नहीं पाना चाहेंगे आप सदाबहार नौजवानी !

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