कोई बात जो लगे है आपको बुरी
टूक–टूक कर दे जो प्रीत से भरे दिलों को
दूसरों से ऐसी बातें आप तो न बोलिए
टूक टूक कर दे जो प्रीत से भरे दिलों को
भ्ूाल के भी मुख से न वैसी बातें बोलिए ।
हवा में घुला है जाने कितना जहर यहाँ
कटु वाणी बोल के न और विष घोलिए
लगताम नहीं कदापि इसमें अधिक श्रम
हो सके तो प्रेम पगी बतियाँ ही बोलिएँ ।
चारों ओर है अशांति की तलाश है तमो
प्राणी मात्र से सदैव मीठी वाणी बोलिए
घर में लगी जो आग पहले बुझाएँ उसे
बन के विजन इत उत मत डोलिए ।
मीठी वाणी करती प्रभु को भी द्रवित सदा
इसलिए सबसे मधुर वचन बोलिए
छोटी सी है जिन्दगी भुला के सारे भेदभाव
सबके लिए ह्दय में प्रेम रस घोलिए ।
देती नहीं सुख कभी सम्पदा अपार यहाँ
मीठा राम नाम कभी मुख से तो बोलिए
आते वही काम वही सुख के हैं धाम
वहीं करे कल्याण जय जय सीताराम बोलिए ।
डॉ.गीता गुप्त
