नेपाली नागरिकों के बच्चों को नेपाली नागरिकता से वंचित करने की साजिश है।सत्तारूढ़ जनता समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र यादव ने राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी पर नागरिकता विधेयक को बिना मान्य किए पुनर्विचार के लिए संघीय संसद में वापस कर विपक्ष की भूमिका निभाने का आरोप लगाया है।
विधेयक को वापस लेने के राष्ट्रपति के कदम का देश पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। इसका विशेष रूप से तराई/मधेस समुदायों पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। ऐसे नागरिक हैं जो नागरिकता से वंचित हैं। यह उन लोगों को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा जो तराई/मधेस, पहाड़ियों में नागरिकता से वंचित हैं। यह राष्ट्रपति के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।” उन्होंने कहा, “वैवाहिक प्राकृतिक नागरिकता का मुद्दा अलग है।इसमें नहीं जोड़ा जा सका। विवाह वैधीकरण की बात यहाँ कहाँ लिखी गई है? जो बिल में नहीं है उसे लाने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं है। संविधान ने यह अधिकार नहीं दिया है। शादी के 7 साल बाद वैवाहिक नागरिकता देने की बात कहने वाले विपक्ष ने अध्यादेश जारी करते समय इसे क्यों नहीं रखा? क्या विपक्ष की भूमिका राष्ट्रपति निभा सकते हैं?

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