पिछले पूस महीने में सर्लाही के रामानुज साह सपरिवार गाँव गए थे । एक दिन दोपहर में उनकी पत्नी तथा बच्चे घर में अकेले ही थे कि आँगन में एक करैत सांप घूमता हुआ दिखा । बच्चे तो डर कर कमरे में छिप गए लेकिन पत्नी अड़ोस पड़ोस के लोगों को आवाज लगाने लगी । कुछ  हिलाएं दौड़ी हुई आर्इं लेकिन कोई भी युवा नहीं दिखा , जो उस सांप को मार सके । पूछने पर महिलाएं कहने लगी कि पूरे गाँव में गिने चुने एक दो युवा हैं बाकी तो रोजगारी के लिए भारत या खाडी देशों में गए हुए हंै । गाँव में तो केवल हम महिलाएं, वृद्ध–वृद्धा और बच्चे ही रहते
हैं । लेकिन आज छह महीना बाद परिस्थिति ने ऐसा पलटा खाया है कि सभी वैदेशिक रोजगार में गए युवाओं को वापस अपने गाँव घर लौटना पड़ रहा है । विश्वव्यापी कोरोना के त्रास और कहर ने करोड़ों व्यक्तियों के जीविकोपार्जन को चौपट कर दिया है । अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के हाल के रिपोर्ट के अनुसार नेपाल के औपचारिक क्षेत्र में ५७ लाख कार्यरत नेपालियों में से तत्काल ३७ लाख नेपालियों का रोजगार संकट में पड़
चुका है ।यह वे लोग है जिनकी आय अर्जन शक्ति दैनिक ३५० रुपया के आस पास है । २०११ की जनगणना अनुसार प्रदेश २ की कुल आबादी ५४ लाख ,४ हजार १४५ थी । सन् २०१६–१७ में वैदशिक रोजगार में प्रदेश २ से कुल १ लाख ८ हजार ३१ व्यक्तियों ने श्रम स्वीकृति ली थी । यह संख्या नेपाल के कुल श्रम स्वीकृति लेने वाले व्यक्तियों का २ ९ प्रतिशत है । लॉकडाउन के बाद भारत २७ हजार व्यक्ति प्रदेश २ वापस लौट आए हंै जबकि यातायात खुलने पर लगभग ५ लाख युवाओं का घर वापसी का अनुमान है । वापस लौटनेवालों

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