नेपाल से प्रकाशित होनेवाली एकमात्र राष्ट्रीय हिंदी मासिक पत्रिका ‘द पब्लिक’ का दो दिवसीय १५ वाँ वार्षिकोत्सव तथा सम्मान ÷पुरस्कार कार्यक्रम २४–२५भव्यवता के साथ काठमांडू में संपन्न हो गया ।
वाषिर्कोत्सव के आषाढ़ १० गते को काठमांडू के कोटेश्वर स्थित एवन होटल में ‘द पब्लिक’ की संपादक ÷प्रकाशक वीणा सिन्हा की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम की प्रमुख अतिथि थी प्रतिनिधि सभा की उपसभामुख इंदिरा राणा । जबकि कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथियों में पूर्व उपप्रधान मंत्री माननीय उपन्ेद्र यादव महिला आयोग की अध्यक्ष माननीय कमला कुमारी पराजुली, भाषा आयोग के अध्यक्ष डॉ गोपाल ठाकुर, नेपाल पत्रकार महासंध की अध्यक्ष निर्मला शर्मा, राष्ट्रीय समाचार समिति के कार्यकारी अध्यक्ष धमेन्द्र झा, राष्ट्रीय योजना आयोग की सदस्य सलोनी प्रधान सिंह ,भारतीय दूतावास के प्रथम सचिव डॉ साहिल कुमार, प्रतिनिधि सभा के सदस्य माननीय प्रकाश अधिकारी, प्रेस काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष बालकृष्ण बस्नेत, गोरखा पत्र के पूर्व अध्यक्ष कृष्ण मुरारी भंडारी तथा वरिष्ठ साहित्यकार डॉ राम दयाल राकेश,संस्कृतिविद् धीरेन्द्र प्रेमर्षि, पूर्व बागमती प्रदेश सदस्य विजया केसी, वरिण्ठ पत्रकार बबिता बस्नेत की विशेष उपस्थिति थी । जसपानेपाल के उपाध्यक्ष विद्युत व्रजाचार्य, नेत्री ललिा सिटौला ,निर्मला यादव , विनिता यादव, रीता अग्रवाल त्रिभुवन विश्वविद्यालय की हिन्दी विभाग की उप्रध्यापक मंचला झाइसके साथ ही अनेक लेखक, साहित्यकार, समाजसेवी तथा द पब्लिक के पाठकों की बड़ी संख्या में उपस्थिति थी ।
वार्षिकोत्सव पर ‘द पब्लिक’ की ८० पृष्ठों की विशेष स्मारिका का लोकार्पण उपसभामुख इंदिरा राना तथा पूर्व उपप्रधानमंत्री उपेन्द्र यादव ने किया । इसी अवसर पर द पब्लिक की संपादक तथा साहित्यकार वीणा सिन्हा की दो यात्रा संस्मरण ‘मेरी अमेरिका की यादें’ तथा ‘हमारी दुबई भ्रमण’ का भी लोकार्पण प्रमुख तथा विशिष्ट अतिथियों द्वारा किया गया । जो कि नेपाल के हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में पहला संस्मरण है ।
‘द पब्लिक’ के वार्षिकी के इस अवसर पर अपनी शुभकामना मंतव्य देते हुए उप सभाखुख इंदिरा राना ने कहा कि देश में १२३ भाषा है तथा पौने तीन करोड़ भाषी हैं और सभी नेपाली जनता को अपनी भाषा तथा साहित्य का संरक्षण करने का अधिकार है । उपसभामुख राना ने आगे कहा कि सभी को मातृभाषा में सूचना पाने का हक है । पन्द्रह वर्ष से निरंतर एक महिला द्वारा प्रकाशन तथा संपादन करते हुए आ रही पत्रिका ‘द पब्लिक’ ने हिंदी भाषाी पाठकों के सूचना के हक को सम्मान किया है यह प्रशंसा की बात है ।
उपसभामुख राना ने कहा कि देश में विभिन्न भाषा की पत्रपत्रिकाएँ निकलती है लेकिन वे एक दो अंक या एक दो वर्षो में ही बंद हो जाती है । प्रकाशन के दौरान आनेवाली समस्याओं को लंबें अर्से तक झेल नहीं पाती है लेकिन द पब्लिक की संपादक वीणा सिन्हा विगत पन्द्रह वर्षोें से निरंतर विविध समस्याओं को झेलते हुए उसे दूर करते हुए आज इस मुकाम पर पहुँची है । इसके लिए बधाई के पात्र हैं । उप सभामुख ने कहा कि ‘द पब्लिक’ संपादक इसलिए भी बधाई है कि उन्होंने नेपाल में पहली बार हिंदी भाषा में यात्रा संस्मरण लिखा तथा प्रकाशित किया है । वैसे तो हम सभी कहीं न कहीं की यात्रा करते रहते हैं, मैं स्वयं ४० से ज्यादा देशों की यात्रा कर चुकी हूँ लेकिन मैं आज तक कोई यात्रा संस्मरण नहीं लिखा है लेकिन वीणा सिन्हा ने अपनी यात्रा संस्मरण के माध्यम से अमेरिका तथा दुबई के बारे जो तथ्यपरक जानकारियाँ दी हैं तथा अपने अनुभवों को पाठकों के साथ शेयर किया है, उससे पाठकों के ज्ञान में अवश्य अभिवृद्धि होगी ।
इस अवसर पर पूर्व उपप्रधानमंत्री उपेन्द्र यादव ने कि हिंदी भाषा नेपाल की प्रमुख भाषा रही है । शिक्षा से लेकर सरकारी कामकाज में हिंदी के योगदान को नकारा नहीं जा सकता । आज भी हिन्दी नेपाल में नेपाली भाषा के बाद सबसे ज्यादा बोली तथा समझी जाने वाली भाषा है ।
‘द पब्लिक’ ने लोगों में हिन्दी भाषा के लगाव को बनाए रखा है । निरंतर द पब्लिक का प्रकाशन करना सबके वश की बात नहीं है । वीणा सिन्हा एक कर्मशील तथा जुझारु महिला हैं जो पहुँची हैं, यह सराहनीय है । हम आशा करते हैं कि द पब्लिक निरंतर ऐसे ही प्रकाशित होती रहे ।
इस अवसर पर द पब्लिक की प्रकाशक तथा संपादक वीणा सिन्हा ने द पब्लिक के १५ वर्षों की यात्रा के दौरान आनेवाली समस्याओं तथा उपलब्धियों की विस्तृत चर्चा की तथा यह भी जानकारी कराई कि भारत से बाहर हिन्दी भाषा में लगातार आजतक निरंतर कोई भी पत्रिका नहीं निकल पाई है और सबसे बड़ी बात की ‘द पब्लिक’ नेपाल के काठमांडू से निकली है लेकिन आज यह वैश्विक स्वरुप ले चुकी है । यह बेवसाइट तथा फेसबुक पर भी उपलब्ध है ।
अमेरिका, कनाडा, सिंगापुर ऑस्ट्रेलिया ,न्यूजीलैंड, कतार ,रूस, श्रीलंका, बंगलादेश तथा लंदन की सफर कर चुकी है । यह पत्रिका आनलाइन विश्व के एक दर्जन से ज्यादा देशों में पढ़ी जाती है । यह पत्रिका नेपाल के राष्ट्रपति प्रधानमंत्री, रुस के राष्ट्रपति पुतित, भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, श्रीलंका के राष्ट्रपति के हाथों में भी पहुँच गई है ।
पत्रिका के संपादक के तौर पर ४५ से ज्यादा पुरस्कार तथा सम्मान भी प्राप्त होने का सुअवसर भी प्राप्त हुआ है ।
इस विशेष अवसर पर ‘द पब्लिक’ के संपादक को “स्वामी विवेकानंद सम्मान २०२५” उद्भव सामाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यक संस्था द्वारा प्रदान किया गया । जिसे कार्यक्रम की ्रमुख अतिथि नेपाल की उपसभामुख इंदिरा राना ने संपादक वीणा सिन्हा को प्रदान किया । नेपाल तथा भारत के २१ विभिन्न व्यक्तियों को जिन्होंने ‘द पब्लिक’ में पिछले १५ वर्षों से लगातार योगदान करते रहे हैं, का कद्र करते हुए सम्मानित किया ।
भारत से वरिष्ठ साहित्यकार ,पत्रकार तथा शिक्षाविदों श्री शैलेन्द्र शैल,डॉ किरण डगवाल, डॉ बी एल गौड,डॉ वीणा मित्तल, डॉ विवेक गौतम, डॉ सुशांत कुमार, डॉ अरुण प्रकाश ढौडियाल सम्मानित हुए । दो व्यक्तियों को ’विश्लेषक चंद्रकिशार जी को ‘हरि–बबन पुरस्कार’ तथा डिजाइनर सानुराम दाहाल को ‘सीता–सविता पुरस्कार’ प्रदान किया गया ।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथियों ने भी ‘द पब्लिक’ को शुभकामना देते हुए अपना–अपना मंतव्य दिया ।
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत द पब्लिक के महाप्रबंधक मनोज कुमार वर्मा ने किया कार्यक्रम का संचालन मुकेश मिश्र द्वारा किया गया ।

