द पब्लिक’ के वार्षिकोत्सव के अवसर पर नेपाल भारत पुस्तकालय ,काठमांडू में द पब्लिक की प्रकाशक तथा संपादक ने नेपाल भारत साहित्य संगोष्ठी आयोजित किया था । इस साहित्यिक कार्यक्रम की अध्यक्षता की नइ प्काशन एकेडमी की कुलपति इंदिरा प्रसाई ने । कार्यक्र के प्रमुख अतिथि थे भारत से आए वरिष्ठ साहित्यकार, शिक्षाविद् तथा पत्रकार डॉ विवेक गौतम तथा विशिष्ट अतिथि थे भारत के वरिष्ठ कवि तथा साहित्यकार अरुण ढौडियाल तथा नेपाल के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ दयाल राकेश ।
संगोष्ठी में अतिथियों का स्वागत किया ‘द पब्लिक’ की संपादक वीणा सिन्हा ने उन्होंने संगोष्ठी में प्रस्तुत किए जानेवाले विषयों पर संक्षिप्त प्रकाश डाला ।
इस संगोष्ठी के प्रथम भाग में पाँच कार्यपत्र प्रस्तुत किए गए । बहुभाषिक साहित्यकार वीणा सिन्हा की तीन पुस्तकों में प्रकाशित ५५ कहानियों के मूल भाव की समीक्षा पद्मकन्या महाविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रमुख डिल्ली राम शर्मा ने प्रस्तुत किया । नेपाल भारत संबंधों में हिंदी भाषा की भूमिका विषय पर त्रिभुवन विश्वविद्यालय के उपप्रध्यापक विनोद विश्वकर्मा ने कार्यपत्र प्रस्तुत किया ।
भारत से आए विद्वान साहित्यकार डॉ अरुण ढौडियाल ने आधुनिक हिंदी काव्य की धाराओं पर अपना मंतव्य रखा । सहायक प्राध्यापक, बी आर ए बिहार विश्व विद्यालय,मुजफ्फरपुर बिहार, भारत के डॉ सुशांत कुमार ने हिंदी कहानियों में आंचलिकता तथा व्यंग्य रचना का समाज पर प्रभाव,पर
उपेन्द्र प्रसाद सहायक प्राध्यापक, बी आर ए बिहार विश्व विद्यालय,मुजफ्फरपुर बिहार, ने अपना मंतंव्य दिया ।
संगोष्ठी के दूसरे सत्र में भारत से आईं डॉ वीणा मित्तल (वरिष्ठ लेखिका श्री शैलेंद्र शैल (वरिष्ठ साहित्यकार–कवि, डॉ.अरुण प्रकाश ढौंडियाल (वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.विवेक गौतम (कवि,शिक्षाविद् तथा पत्रकार
प्रो. डॉ किरण डंगवाल (वरिष्ठ साहित्यकार) डॉ. अभिनय कुमार तथा डॉ.शशिकुमार पासवान तथा नेपाल से गागिका तथा कवि रुपा झा ,धीरेद्र प्रमर्षि, रिते कंडेल,अंजली पटेल,द्वारिका कुइकेल, शांता नारंग, राधेश्याम लेकाली, राजेश कुमार आदि लगभग ४० कवियों ने नेपाली ,भोजपुरी ,मैथिली, थारु , अवधी तथा हिंदी भाषा में काव्य पाठ किया ।
कार्यक्रम के अंत में विशिष्ट अतिथि डॉ राम दयाल राकेश ने अपने मंतव्य में कहा कि आयोजक तथा ‘द पब्लिक’ की संपादक प्रकाशक वीणा सिन्हा नेपाल में हिंदी भाषा साहित्य के क्षेत्र में जो कार्य कर रही हैं वह अद्वितीय है । सीमित संसाधन के बावजूद पिछले पन्द्रह सालों से लगातार वीणा सिन्हा तथा मनोज वर्मा ने जो कार्य किया है उसको तो भारत सरकार तथा नेपाल सरकार को करना चाहिए था ।
संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहीं इंदिरा प्रसाई ने कहा कि पत्रिका निकलना आसान कार्य नहीं है । उसपर हिंद भाषा में पत्रकारिता करना और भी कठिन है लेकिन वीणा सिन्हा जोकि एक कर्मठ तथा जुझारु महिला हे ने अपने बलबूते पर पिछले पन्द्रह वर्षों से यह कार्य करती आ रही है वह भी सफलता पूर्वक ,उसकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है । उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि द पब्लिक इसी तरह निरंतरता पाती रहेगी और अपना २५– ५० वार्षिकोत्सव मनाएंगी ।
