प्रतिनिधि सभा विघटन की रिट पर सर्वोच्च अदालत की संवैधानिक इजलास में बहस जारी है। देव गुरुंग और संतोष भंडारी की रिट पर बहस करते हुए अधिवक्ता दीनमणि पोखरेल ने प्रधानमंत्री को प्रतिनिधि सभा विघटन करने का हक़ नहीं है, का जिक्र किया। उन्होंने पार्टी के अंदर की असंतुष्टि को संतुलित न कर सकने के कारण विघटन नहीं किया जा सकता, यदि सरकार नहीं चलाई जा सकती तो इस्तीफ़ा देकर अलग होने के आलावा प्रधानमंत्री के पास और कोई विकल्प न होने की बात पोखरेल ने की।
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प्रधान न्यायाधीश चोलेन्द्र शमशेर राणा ने ‘प्रधानमंत्री यदि सरकार नहीं चलाना चाहते तो जबरजस्ती की जा सकती है’ पूछे गए सवाल पर जबाव में कहा गया कि बहुमत है परन्तु सरकार नहीं चला सकते तो छोड़ देना चाहिए। इस्तीफ़ा देकर जाना चाहिए संसद का विघटन नहीं।
उन्होंने असंवैधानिक तरीके से घोषित चुनाव संवैधानिक नहीं हो सकता का जिक्र करते हुए अदालत को जनता की मर्जी से अनुभूत होना चाहिए का तर्क किया। ‘दरबाजे के बाहर देखकर फैसला किया जाय मेरा ऐसा मानना नहीं है। जनता की इच्छा को अदालत द्वारा अनुभूत किया जाना चाहिए’ उन्होंने बहस के क्रम में कहा।
