कृषि तथा पशुपन्छी विकास मंत्रालय के अनुसार आर्थिक वर्ष २०७७÷७८ में ५६ लाख २१ हजार ७१० टन धान का उत्पादन हुआ है । जबकि पिछले वर्ष ५५ लाख ५० हजार ८७८ टन धान उत्पादन हुआ था । इस वर्ष उत्पादन ७० हजार ८३२ टन बढ़ा है । अर्थात् ०.२८ प्रतिशत से बढ़कर ३.८२ हो गया है । धान का उत्पादकत्व अभी तक का उच्च है । विगत पाँच वर्षों के धान उत्पादन का विश्लेषण करने पर आर्थिक वर्ष २०७३÷७४ की तुलना में इस वर्ष उत्पादन करीब ७.४८ प्रतिशत ज्यादा हुआ है ।
मंत्रालय के अनुसार सबसे ज्यादा प्रदेश २ में धान का उत्पादन हुआ है । इस प्रदेश में ३ लाख ८२ हजार २७५ हेक्टर धान की रोपाई हुई है जिसमें १४ लाख २० हजार ४३६ टन उत्पादन हुआ है । दूसरे स्थान पर प्रदेश १ है जहाँ १२ लाख ७५ हजार ५५४ टन धान का उत्पादन हुआ है । प्रदेश १ में ३ लाख ३० हजार ४३८ हेक्टर क्षेत्र में रोपाई की गई थी । प्रदेश १ और २ में उत्पादन के साथ ही रोपाई का क्षेत्र भी बढ़ा है ।
बागमती प्रदेश में मंत्रालय के अनुसार इस वर्ष ५ लाख ९ हजार ५९० टन ही धान का उत्पादन हुआ है जबकि रोपाई का क्षेत्रफल बढ़ा है । पिछले वर्ष ५ लाख १० हजार २०१ टन धान का उत्पादन हुआ था । गण्डकी प्रदेश में ४ लाख ८ हजार ७३७ टन धान का उत्पादन हुआ था जबकि पिछले वर्ष की तुलना में इसबार ३ लाख ९७ हजार ९४ टन ही धान का उत्पादन हुआ है । गण्डकी प्रदेश में धान रोपने का क्षेत्रफल और उत्पादन दोनों घटा है । लुम्बिनी प्रदेश में धान रोपने के क्षेत्रफल बढ़ने के साथ ही उत्पादन में भी वृद्धि हुई है । इस वर्ष १२ लाख २४ हजार ४ सौ ९७ टन उत्पादन धान का हुआ है ।

pile of peddy closeup

कर्णाली में १ लाख ३७ हजार १६५ टन, सुदूर पश्चिम में ६ लाख ४४ हजार ९ सौ ९१ टन धान के उत्पादन होने की जानकारी मंत्रालय ने दी है ।
इस वर्ष धान उत्पादन में वृद्धि होने का प्रमुख कारण मॉनसून का समय पर सक्रिय होना और बीज की उपलब्धता रही है । जेठ ३० गते से मॉनसून सक्रिय हो गया था और पिछले वर्ष की तुलना में औसत ४१४ मिमी अर्थात् ३१ प्रतिशत ज्यादा वर्षा हुई थी ।
श्रमिकों का अभाव न होना भी धान उत्पादन में वृद्धि का प्रमुख कारण रहा है । कोविड–१९ के संक्रमण फैलने न देने के लिए सरकार द्वारा लॉकडाउन की घोषणा की गई थी जिसकी वजह से बड़ी संख्या में शहर से जनता का अपने घरों की ओर पलायन हुआ । विदेश से भी लोग वापस अपने घर–गाँव लौटे । एक स्थान से दूसरे स्थान आवागमन पर प्रतिबंध होने की वजह से लोगों को विवश होकर अपने गाँवों तक सीमित रहना पड़ा । जबकि अन्य कोई काम उपलब्ध न होने की स्थिति में कृषि कार्य में संलग्न रहे ।
बाँझ जमीनों पर भी रोपाई करने का अभियान चला, जिसके परिणाम स्वरूप रोपाई का क्षेत्रफल बढ़ा उसके परिणाम स्वरूप उत्पादन में भी वृद्धि हुई । पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष १४ हजार ५५९ हेक्टर क्षेत्रफल की वृद्धि हुई । इसबार ज्यादा धान उत्पादन होने के बाद भी देश को धान उत्पादन में आत्मनिर्भर होने के लिए १० लाख टन कम है । जोकि आयात से पूर्ति की जाएगी । धान का आयात मुख्य रूप से भारत से होता है । मंत्रालय का कहना है कि उपभोक्ता के आयस्तर में वृद्धि होने के कारण उनकी क्रयशक्ति भी बढ़ी है । महीन चावल खाने की आदत बढ़ने के कारण धान का आयात करना पड़ता है ।

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