क्याें भैयाजी, क्याें उदास हो
मुँह क्याें फुला क्या ढंग है
चुपके से आकर के किसने
मुख पर यह मल दिया रंग है ।।
दौड़ो झट, पिचकारी मारो
सम्पत ने खिड़की खोली है ।।
बिट्टू बीमार है, मत छेड़ो
दादाजी बूढ़े, मत छेड़ो ।
मजहब न माने, नफीसा का
तो छोड़ा, उसको मत छेड़ो ।।
राग द्वेष ना फैले देखो
गूंजे समता की बोली है ।।
बुरा न बोलो, नाचो गाओ
हिलमिल खेलो, सबके संग ।
भेदभाव की बातें भूलो
मनोज ले आया नया चंग ।।
कीचड़ा उछालना बुरी बात
रंगो से भर लो होली है ।।
