नेपाली राजनीति अपने अंधेरे युग में प्रवेश कर गई है जहाँ न तो कोई व्यक्ति दिख रहा है न उसका व्यक्तित्व । राष्ट्र के उच्च पद पर आसीन व्यक्ति भी अपनी भाषा की मर्यादा को भूलकर निम्नस्तर के कटाक्ष और व्यंग्य बर्षा में जुट गए हैं । आज यूट्यूब तथा टिकटिक वीडियो में उन्हीं का वर्चस्व है । वे लोग मनोरंजन के सबसे सस्ते साधन बन गए हैं । एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए अपने आपको हंसी का पात्र बनाने में ही अपनी काबलियत साबित करने में लगे हैं । प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की तुलना भारत के हास्य व्यंग्य कलाकार कपिल शर्मा से की जाने लगी है । क्योंकि प्रधानमंत्री ओली ने जबसे संसद् विघटन किया है हरेक दिन किसी–न–किसी सार्वजनिक मंच पर विराजमान होकर प्रचंड–नेपाल की बेहद निम्नस्तर की भाषा का प्रयोग कर खिल्ली उड़ाने का कार्य करते हैं । दर्शक दीर्घा में बैठी जनता जोर–जोर से तालियाँ ही नहीं बजाती बल्कि सीटी भी मारती है ठीक वैसे ही जैसे कोई नौटंकी देख रही हो । यह देखकर हमारे प्रधानमंत्री इतराते हुए कहते हैं– आप भारत के किसी भी प्रांत में चले जाइए सभी ओली को पहचानते हैं–‘अब प्रधानमंत्री ओली यह भी बता दें कि ओली की पहचान है नेपाल के कपिल शर्मा के रूप में या प्रधानमंत्री के रूप में !
