म्यांमार की सर्वाेच्च नेता आंग सान सू की सहित कई अन्य वरिष्ठ नेताओं को वहां की सेना ने हिरासत में ले लिया है। सेना ने राष्ट्रपति विन मिंट व सत्ताधारी पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में लिया है। समाचार एजेंसी रायटर्स ने खबर दी है कि वहां की सेना ने सत्ता पर अपना कब्जा कर लिया है और आंग सान सू की व सरकार की शक्तियों को जब्त कर लिया है।

रॉयटर्स के अनुसार, सेना ने आंग सान सू की और उनकी पार्टी नेशनल लीग ऑफ डेमोक्रेसी के कई दूसरे वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में ले लिया है। सेना ने इस संबंध में कहा है कि इन्हें चुनाव में धोखाधड़ी करने के आरोप में हिरासत में लिया गया है।

हाल में चुनाव के बाद वहां सरकार और सेना के बीच तनाव बढना शुरू हो गया था। इसके बाद सेना की ओर से यह कदम उठाया गया है। सेना की ओर से आरोप लगाया गया है कि चुनाव में धांधली कर नेशनल लीग फाॅर डेमोक्रेसी ने जीत हासिल की थी।

म्यांमार में सत्ता पलट के बाद टेलीफोन लाइनों को काट दिया गया है। इस कारण सू की के पार्टी के लोग आपस में संपर्क नही ंकर पा रहे हैं। आंग सान सू की अपने देश में स्टेट काउंसलर के पद पर हैं और सत्ता की ताकत उनके पास ही रही है। वहां के संविधान की कुछ बाध्यताओं की वजह से वे राष्ट्रपति नहीं बन सकती हैं, ऐसे में वे अपनी पार्टी की ओर से इस पद के लिए प्रत्याशी तय करती हैं।

म्यांमार की घटना पर अंतरराष्ट्रीय स्तर से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से इस संबंध में प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया है कि म्यांमार की घटना पर हमारी नजर है। म्यांमार में लोकतांत्रिक परिवर्तन की प्रक्रिया में भारत हमेशा अपने समर्थन के साथ रहा है। हमारा मानना है कि कानून के शासन और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कायम रखना चाहिए। इस स्थिति पर हम करीब से नजर रख रहे हैं।

वहीं, अमेरिका के व्हाइट हाउस की प्रवक्ता जेन साकी ने कहा कि म्यांमार की सेना ने स्टेट काउंसलर और अन्य नेताओं को हिरासत में लेकर लोकतंत्र को कमजोर किया है। राष्ट्रपति जो बिडेन को इसके बारे में जानकारी दी गयी है। अमेरिका ने कहा है कि हम म्यांमार में लोकतांत्रिक संस्थाओं को अपने मजबूत समर्थन का ऐलान करते हैं। अमेरिका ने कहा है कि स्थिति पर हम नजदीक से नजर रख रहे हैं और वहां के लोगों के साथ खड़े हैं।

 

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