अ मेरिका के सर्वोच्च न्यायालय के चौथे प्रधान न्यायाधीश जोन मार्सल ने नागरिकता के संबंध में कहा था “या तो नागरिकता नहीं दो । लेकिन नागरिकता देने के बाद नागरिक–नागरिक के बीच भिन्न व्यवहार नहीं करो ।”उपर्युक्त कथन आज हमारे राष्ट्रीय परिवेश में सान्दर्भिक बन गया है । क्योंकि प्रतिनिधि सभा के अंतर्गत रहे राज्य व्यवस्था तथा सुशासन समिति ने नागरिकता के संबंध में वर्तमान व्यवस्था में संशोधन
करते हुए विदेशी महिला का नेपाली पुरुष के साथ विवाह करने पर विवाह के सात वर्ष बाद वैवाहिक अंगीकृत नागरिकता देने का विभेदकारी और नागरिक–नागरिक के बीच अलग–अलग व्यवहार करनेवाला कानून पास कर संसद् में भेजा है । उसके साथ ही उस विधेयक की पक्ष तथा विपक्ष में बहस शुरू हो गया है ।
