होली रंगाें का त्यौहार है, खुशियाें के रंग, सुख–समृद्धि रंग, बुराइयाें पर विजय रंग, सच्चाई की जीत के रंग, सच्चाई की जीत के रंग ।
होली के दिन लोग एक–दूसरे के रंग लगाते हैं रंगाें को पानी में घोलकर भी होली खेली जाती है ।
बाजÞार में कई तरह के रंग मिलते हैं । आरारोट से तैयार किया गया गुलाल या रंग अच्छे होते हैं । ये त्वचा पर बुरा प्रभाव नहीं छोड़ते ।
कुछ रंगाें में मिट्टी, खडि़या, अभ्रक आदि मिले होते हैं, वे त्वचा व आँखाें को हानि पहुँचा सकते हैं । कुछ रंगाें में ग्रीस, मोबिल ऑयल आदि भी मिले होते हैं । इनसे त्वचा में जलन पैदा होती है ।
बच्चाें ,आप जानते हो कि पानी की कमी जैसी समस्या कितना बड़ा रूप ले रही है । पानी की बचत करना हर एक का कर्तव्य है । अतः सभी सूखी होली खेलें । एक दूसरे के सूख रंग गुलाल लगाएँ, प्रेम–भाव बढ़ाएँ । इससे पानी की बड़ी बचत हो सकती है । इन बाताें का भी ध्यान रखें ।
१. आप प्राकृतिक रंगाें से भी होली खेल सकते हंै ।
२. रंग लगाने से पहले त्वचा पर नारियल का तेल लगाएँ ।
३. रंग लगाने के बाद धूप में अधिक देर न रहें ।
४. रंग उतारने के लिए बच्चे दूध में बेसन व नीबंू का रस मिलाकर लगा सकते हैं ।
५. त्वचा में जलन हो तो रंग न लगाएँ और चिकित्सक से सलाह लें ।

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