– ललिता बावा
प्रेम मैत्री की सुन्दर आशा
हिंदी की यह गौरव भाषा
हमने पाई हिंदी की सुनहरी धूप
मातृभूमि के मस्तक पर, बिन्दी से चमकता रूप
हिंदी शब्दों में वो शक्ति
भावनाओं की सरल अभिव्यक्ति
बोली–बानी में अंतरंगता
भाषा की महक दे मधुरता
अनुराग भरे भावुक कर दे
अपने शब्दों की गहराई से
विश्व हिंदी भाषा से पाता
जीवन मूल्यों की परिभाषा
रसभरी भाषा है अपनी धरोहर
शब्द मिश्री से मीठे मनोहर
विदेशों में हिंदी चर्चा व संगोष्ठी
कही होते यज्ञ, कही उत्सव पर दृष्टि
इग्लैंड, स्कार्टलैंड, नार्वे में हिंदी विभाग
कैंब्रिज, ऑक्सफोर्ड में दिखी हिंदी की छाप
भागवत गीता व रामायण का भी प्रचार–प्रसार
हिंदी भजनों व कीर्तनों का देखा संस्कार
हिंदी नाटकों और फिल्मों की भी चित्रकारी
विश्व हिंदी पुस्तक मेलों की भी किलकारी
हिंदी कहानियों का विश्व भाषाओं में अनुवाद
और पुराने हिंदी गीतों की सुनहरी याद
हर भाषा से हम खूले मन से रहे रजामन्द
संवेदनशील मोड़ों पर शब्दों की मिठास का ले आनन्द
हिंदी शब्दों में मैत्री भाव, सुंदर मोती से चमके
संपूर्ण घरा में लय हो, इस भाषा की देह दमके ।
