-इन्दिरा प्रसाई

देश ढूढँते रहे हम

तुम्हें गँवाने के बाद

गम खाया हुआ दिल लेकर

तुम्हारी आगोश में समाने की

छटपटाती चाहतो को

शरणार्थी शिविरों में

देखकर, छू कर और चुमकर

ओ देश !

तुम्हारे ना होने की

अनुभूति की

सूक्ष्मतम आभास से भी

डर रही हूं मैं ।

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