नेपाल के साथ भारत विवाद रहित संबंध रखना चाहता है ।
नेपाल भ्रमण पर आए भारत के जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज संकाय के डीन प्रो. श्रीकांत कोंडापल्ली से ‘द पब्लिक’ संपादक वीणा सिन्हा ने नेपाल और भारत से जुड़े मुद्दों तथा दोनों देशों के संबंधों पर बातचीत की । प्रस्तुत है उक्त बातचीत का प्रमुख अंश ः
१.नेपाल भारत संबंध को आप कहाँ पाते हैं ? .
भारत के साथ नेपाल का संबंध सदियों पुराना है । हमारी संस्कृति, सामाजिक–आर्थिक विशेषताएँ समान हंै । मोदी सरकार के आने के बाद नेपाल के विकास के क्षेत्र में भारत की ओर से बहुत ज्यादा निवेश किया गया है । रेलवे संर्वेक्षण, हाइड्रोपावर, बिजली, सड़क तथा शिक्षा आदि क्षेत्रों में भारत का सहयोग बढ़ा है । वैसे कभी–कभी गलतफहमी की वजह तनाव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है जिसे स्वाभाविक माना जाना चाहिए ।
२.सुगौली संधि को लेकर प्रायः विवाद उत्पन्न होना उचित है ?
१९५१ की सुगौली संधि को लेकर नेपाल में कई तरह की बातें कही जाती है । आगामी दिनों में सुगौली संधि को भी दोनों देशों की सहमति के आधार पर परिमार्जित किया जा सकता है । भारत की यह नीति कभी भी नहीं रही है कि वह अपने पड़ोसी देशों के साथ विवाद उत्पन्न करे । भारत की भूटान के साथ भी एक संधि थी जिसे भूटान के आग्रह पर भारत सरकार ने परिमार्जन किया । वैसे ही बंगलादेश के करीब रहे दो द्वीपों के आधिपत्य को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ तो भारत ने उसे बंगलादेश को सौंपकर विवाद का अंत कर दिया । वैसे ही नेपाल के साथ भी भारत विवाद रहित संबंध रखना चाहता है ।
३.प्रायः सीमा क्षेत्र में विवाद उत्पन्न होने का कारण क्या है ?
सीमा पर जहाँ कहीं विवाद है या होता है तो दोनों ही देशों के संबंधित अधिकारियों को सुलझाना चाहिए । दरअसल जो काली नदी को लेकर विवाद उत्पन्न करने की कोशिश हुई है वह गलतफहमी के कारण हुई है । सूचना का सही संप्रेषण न होने के कारण प्रायः इस तरह की गलतफहमियाँ पैदा होती है , जो कि उचित नहीं है ।
४. दोनों ही देशों के बीच संबंध सौहार्दपूर्ण बनाने के लिए क्या करना चाहिए?
भारत हमेशा ही अपने पड़ोसी देशों के साथ अच्छे रिश्ते बनाने का भरसक प्रयास करता रहा है । पड़ोसी देशों को भी वैसा ही व्यवहार करना चाहिए । विगत में नेपाल ने सुगौली संधि के विपरीत चीन से हथियारों की खरीद की थी, बिना भारत को जानकारी दिए । उसी तरह मधेशी आंदोलन के समय सीमाबंदी मधेश की जनता ने किया था लेकिन भारत पर आरोप लगाया गया कि वह मधेशी जनता को उकसा रहा है और उसी का बहाना कर नेपाल सरकार द्वारा चीन से पेट्रोल–डीजल मंगाया गया लेकिन आगे चलकर चीन ने क्यों नहीं पेट्रोल–डीजल का सप्लाई किया । इस बात को नेपाल को समझना चाहिए । स्पष्ट है दोनों ही देशों के बीच का सौहार्दपूर्ण संबंधों को विवाद में घसीटने का प्रयास तीसरे देशों द्वारा किया जाता है तो उसके पीछे की मंशा को दोनों ही देशों को समझना चाहिए और संयम बरतना चाहिए ।
५.क्या नेपाल विश्व शक्तियों का क्रीड़ा स्थल बनता जा रहा है ?
नहीं, ऐसा तो नहीं लगता । लेकिन नेपाल को सतर्क रहना चाहिए । विश्व शक्तियाँ अपनी स्वार्थपूर्ति के लिए किसी का भी इस्तेमाल कर सकती हैं । यह तय करना तो नेपाल को है कि वह अपना इस्तेमाल न होने दे । नेपाल आकार में छोटा होने के बावजूद एक संप्रभु राष्ट्र है । वह विश्व में अपना एक सम्मानजनक स्थिति बनाकर रखे । उसे अपने हित को ध्यान में रखते हुए तटस्थता की नीति को दृढ़ता के साथ पालन करना उचित होगा ।
६.नेपाल में नया सरकार गठन के संबंध में आपकी क्या धारणा है ?
नेपाल में किसी भी दल या गठबंधन की सरकार बने, भारत सरकार उसके साथ सहकार्य करने के लिए तैयार है । यह तो नेपाल में बननेवाली सरकार पर निर्भर करता है कि वह भारत के साथ कैसा संबंध रखती है । वैसे आशा करनी चाहिए कि जिसकी भी सरकार बने दोनों ही देशों का संबंध सौहार्दपूर्ण तथा सहयोगात्मक ही रहेगा ।
