देश भर के कृष्ण मंदिरों में विशेष रूप से महिलाओं और पुरुषों द्वारा भगवान कृष्ण की पूजा करने, उपदेश देने, भजन कीर्तन करने और पूरी रात जागने की परंपरा है। देशभर में आज भगवान श्री कृष्ण की पूजा-अर्चना कर श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जा रहा है। ज्ञान योग, कर्म योग और भक्ति योग के प्रणेता भगवान कृष्ण का जन्म द्वापरयुग में भाद्रकृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि को हुआ था। इस दिन देशभर के कृष्ण मंदिरों में विशेष रूप से महिलाओं और पुरुषों द्वारा भगवान कृष्ण की पूजा-अर्चना, उपदेश, भजन-कीर्तन और पूरी रात जागने की परंपरा है।
इस अवसर पर आज पाटन के मंगलबाजार स्थित प्रसिद्ध कृष्ण मंदिर में मेला लगता है। इसी तरह राजधानी के उत्तरपूर्वी हिस्से में स्थित कागेश्वरी मनोहरा नगर पालिका के नवतनधाम में भी भक्तों की भीड़ लगी रहती है.
उत्तरी भाग में स्थित बुधनिलकंठ में नेपाल अंतर्राष्ट्रीय श्री कृष्ण चेतना संघ (इस्कॉन) के कार्यालय में स्थित कृष्ण मंदिर में भी भक्त आते हैं। राजधानी के बाहर श्रीकृष्ण मंदिर में भी भक्तों की भीड़ है.
सभी मनुष्यों की अन्याय, अत्याचार तथा राक्षसी प्रवृत्तियों से रक्षा करना भगवान विष्णु के आठवें अवतार के रूप में जन्मे श्रीकृष्ण ने जीवन भर मानव समुदाय को सत्य के पक्ष में खड़े रहकर अच्छे कर्म करने की प्रेरणा दी। कुरुक्षेत्र में कौरवों के साथ युद्ध में शामिल पांडवों में से एक अर्जुन को उपदेश श्रीमद्भागवत गीता को स्वयं श्री कृष्ण के मुखारविंद से व्यक्त एक पवित्र ग्रंथ माना जाता है। यह पुस्तक, जिसे संक्षेप में गीता के नाम से भी जाना जाता है, माना जाता है कि इसका दुनिया की सबसे अधिक भाषाओं में अनुवाद किया गया है.
