अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में द पब्लिक संपादक सम्मानित
सावन २५ गते को काठमांडू के ग्रीन लीफ रेस्टोरेंट में आयोजित कवि सम्मेलन में देश–विदेश से आए कवियों ने विभिन्न…
सावन २५ गते को काठमांडू के ग्रीन लीफ रेस्टोरेंट में आयोजित कवि सम्मेलन में देश–विदेश से आए कवियों ने विभिन्न…
बहन, राखी भेजवा देना, अबकी मैं ना आ पाऊंगा। काम बहुत हैं ऑफिस में, मैं छुट्टी ना ले पाऊंगा।। कलाई…
मुझ में यह सामर्थ्य नहीं है मैं कविता कर पाऊँ, या कूँची में रंगों ही का स्वर्ण-वितान बनाऊँ । साधन…
माँ, माँ, माँ… तू सुन सुनकर कभी थकती नहीं, माँ, माँ, माँ… मैं कह कहकर कभी रुकती नहीं। तेरी ममता…
मूल ः लक्ष्मी माली अनु ः गोपाल अश्क नानाजी तुम्हें बेटी कहते हैं मामाजी दीदी कहते हैं पिताजी तुम्हें…
– ललिता बावा प्रेम मैत्री की सुन्दर आशा हिंदी की यह गौरव भाषा हमने पाई हिंदी की सुनहरी…
हिंदी मेरी बोली, हिंदी मेरी माँ की बोली मेरी माँ की बोली, मीठी मीठी सी बोली जैसे मुँह में मिसरी…
कुछ नहीं कहूंगी जाने अनजाने में कुछ हुआ होगा तुम्हें मालूम हो ना हो मुझे तो पता ही था दिलकी…