वीडियो कान्फरेंसिंग आधुनिक सूचना तकनीक का बेजोड़ नमुना है । इसके माध्यम से इंसान अपनों से दूर रहने के बावजूद उनके बहुत करीब होता है…….
६० साल की वृद्धा अपने घर में अकेली हैं । बेटे, बहू, पोते–पोतियां सब दूर रहते हैं । डिनर का टाइम होता है । वह भोजन तैयार कर डिनर टेबल पर खाने के लिए बैठने लगती है । सामने एक ट्रांसपरेंट स्क्रीन लगी है । पास स्थित मोशन डिटेक्शन सेंसर्स सक्रिय हो जाते हैं । वे यह सूचना रिमोर्ट सर्वर को भेजते हैैं कि कोई खाने के लिए बैठने वाला है । रिमोट सर्वर पहले से मौजूद फैमिली मेंबर्स की लिस्ट का स्टेटस देखकर पता लगता है कि वृद्धा का कोई रिश्तेदार, दोस्त उपलब्ध है या नहीं और फिर वह फैमिली मेंबर, जो उस वक्त उपलब्ध है, अपने सिस्टम के एक बटन को दबाता है और आटोमैटिकली उस वृद्धा से जुड़ जाता है ।
इस तरह वर्चुअल गेस्ट अपने आप स्क्रीन पर आ जाता है । वृद्धा को कुछ नहीं करना पड़ता । अकेले डिनर करने का उस का बोझिल एहसास दूर हो जाता है । वह वर्चुअल गेस्ट के साथ बैठ कर बातें करते हुए खाने का आनंद लेती है ।
यह कल्पना नहीं है आज का हकीकत, अब टीवी, मोबाइल और इंटरनेट की तरह ही वीडियो कान्फरेंसिंग के जरिए इंसान अपनों से दूर रहने के बावजूद उनके करीब हो गया है ।

क्या है वीडियो कान्फरेंसिंग
दरअसल, वीडियो कान्फरेंसिंग दूर बैठे दो या उसके अधिक लोगों के मध्य ट्रांसमीटर और रिसीवर की सहायता से आडियो वीडियो सिगनल्स को मिलाने का जरिया है, ताकि उनके बीच सम्पर्क कायम हो सके । संवाद का यह तरीका उन्हें साथ साथ देखने और बात करने में सक्षम बनाता है । फिलहाल ४ तरह के वीडियो कान्फरेंसिंग सिस्टम प्रयोग में लाए जा रहे हैं–टेलीफरेंसिंग सिस्टम, इंटीगे्रटेड कान्फरेंस रूम सिस्टम, सेट टॉप वीडियो कान्फरेंस सिस्टम और डेस्कटॉप कान्फरेंसिग सिस्टम ।
वीडियो कान्फरेंसिंग कारपोरेट वल्र्ड के साथ–साथ अब गवर्नमेंट सेक्टर, ज्यूडिशियरी, डिस्टेंट लर्निंग, एंटरटेनमेंट और टेलीमेडिसिन के क्षेत्र में भी तेजी से अपनी पकड़ मजबूत बना रहा है । इंटरव्यूज, रिव्यूज, मीटिंग्स, प्रोडक्ट लांच, प्रेस कान्फरेंस वगैरह में इस का प्रयोग होने लगा है ।
आने वाले समय में संभव है कि पढ़ाई के लिए स्कूल कॉलेज जाने की जरूरत ही न पडेÞ । कोरोना काल के संक्रमण में घर बैठे ही वीडियो कान्फरेंस के जरिए पढ़ाई हो रही है । इंटरव्यू, अदालत की कारवाई, आपरेशन की प्रक्रिया…..सब कुछ वीडियो कान्फरेंसिंग के जरिए भलीभांति पूर्ण होने लगा है ।
यह भी संभव होने लगा है कि शहर के अपने क्लीनिक में बैठ कर डाक्टर देहात में रहने वाली महिला की डिलीवरी कराए, स्क्रीन पर देखकर बडेÞ से बडेÞ आपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दे । दूरदराज के इलाकों तक आधुनिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराए ।
वल्र्ड हेल्थ पार्टनर्स के प्रोजेक्ट डायरेक्टर गोपी गोपालकृष्णन कहते हैं, ‘‘ वीडियो कान्फरेंसिंग के जरिए अमेरिका जैसे देशों में सर्जरी होने लगी है । पर यह बहुत ही महंगा पड़ता है । आने वाले सालों में खर्च में कमी आने से शायद यह आम बात हो जाए ।”


रिश्तों को जोड़ती टेक्नोलोजी
यह सच है कि अभी वीडियो कान्फरेंसिंग के जरिए सामने वाले व्यक्ति का चेहरा या छोटा प्रतिरूप ही नजर आता है । कोरोना ने इस तकनीक का व्यापक प्रयोग करना लोगों को सीखा दिया है । दूसरों से मिलने के लिए टे«न या फ्लाइट पकड़ कर घंटों यात्रा करने के बजाय चंद पलों में आमने–सामने गपशप, विचार–विमर्श होने लगा है ।
उदाहरणस्वरूप एक मां गोद में अपने नवजात शिशु को उठाए बैठी है और पिता बड़े ही गर्व और स्नेह से अपने बच्चे को निहार रहा है । सामान्य से लगने वाले इस दृश्य को खास बनाया है वीडियो कान्फरेंसिंग तकनीक ने ।
दरअसल, एक औरत का पति (आर्मी अफिसर) उसके करीब नहीं वरन मीलों दूर, सरहद पार अपने फर्ज को अंजाम देने के लिए है । पर अपने बच्चे को देखने की लालसा न रोक सका । वीडियो कान्फरेंसिंग के जरिए वह न सिर्फ बच्चे को देख रहा है, वरन बच्चा किस पर गया है, उस की आंखें कैसी हैं, माथा कितना चौड़ा है जैसी बातों पर कमेंट भी कर रहा है ।
इतना ही नहीं, आने वाले समय में शायद यह भी संभव हो जाए कि मीलों दूर से पिता, अपने बच्चे को गोद में उठाकर चूमने का एहसास भी कर सके ।
आम लोगों की पहुंच में होगी यह तकनीक
१९६० में न्यूयार्क वल्र्ड फेयर में आइकोनिक, अमेरिकन टेलीफोन और टेलीग्राफ कंपनी ने दुनिया के समक्ष पहला पिक्चर फोन प्रस्तुत किया था, जिसमें २ व्यक्ति बात करने के साथ एक दूसरे को फोन स्क्रीन पर भी देख सकते थे, शुरुआत में अधिक कीमत और आपरेशनल कठिनाइयों की वजह से यह आइडिया उतनी तेजी से विकसित नहीं हो सका, मगर समय के साथ साथ इस तकनीक ने अपनी उपयोगिता साबित की है और आने वाले दिनों में हम मोबाइल के जरिए न सिर्फ आवाज सुन सकेंगे एक दूसरे को देख भी सकेंगे यानी यह सब की पहुंच में होगा ।
भविष्य में यह भी मुमकिन होगा कि आप वीडियो इमेजेज मेनिपुलेट कर सकें । अपने घर के पिछवाडेÞ स्थित स्वमिंग पूल से वीडियो कान्फरेंसिंग कर रहे होंगे, पर सामने वाले को स्विमिंग पूल की जगह आफिस के बैकग्राउंड का एहसास दिला सकेंगे, इसी ब्लू स्क्रीन प्रभाव को फिल्म इंडस्ट्री में प्रयोग कर तकनीशियन आस्कर अवार्ड तक ले जाते हैं ।
जाहिर है, ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में जहां व्यक्ति के बीच दूरिया बढ़ रही हैं, सरहदों की दीवारों टूट रही हैं, संवेदनाएं दम तोड़ रही हैं, वीडियो कान्फरेंसिंग उन्हें करीब लाने का काम कर रही है । २ अलग देशों में रह रहे लोगों को भी एक कमरे में साथ होने का एहसास दिलाएगी । बुजुर्गों के लिए चमत्ककार से कम नहीं ।
आज वीडियो कान्फरेंसिंग संचार का सबसे उम्दा साधन बन गया है । जिसका उपयोग शिक्षा, कार्यालय मनोरंजन से लेकर हरेक क्षेत्र में किया जाने लगा है । कोरोना की वजह से लग रहा था कि लोगों और देशों के बीच दूरियां बढ़ती जा रही है वहीं वीडियो कान्फरेंसिंग उन्हें करीब लाने में अहम भूमिका अदा कर रही है ।

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