आज के तनावपूर्ण वातावरण में कम उम्र में ही उभर आयी त्वचा की ये सिलवटें और निशान किसी अनुभव की निशानी नहीं होती बल्कि शारीरिक व मानसिक अस्वस्थता का प्रतीक होती है । यदि सही जानकारी हो तो इन झुर्रियों और झाइयों को वक्त और उम्र से पहले उभरने से रोका जा सकता है और लंबे समय तक त्वचा को स्वस्थ और आकर्षक बनाये रखा जा सकता है ।
झुर्रियां
जन्म के समय शिशु की त्वचा काफी ढीली होती है लेकिन कुछ माह के बाद त्वचा में कसाव आ जाता है । ३०–४० वर्ष की उम्र तक त्वचा तनी हुई, खिंची हुई रहती है लेकिन जैसे उम्र बढ़ती जाती है त्वचा का कसाव कम होने लगता है और त्वचा ढीली पड़ जाती है । इसी त्वचा के ढीलेपन को ही झुरियां पड़ना कहते है । शरीर पर खास कर के चेहरे, आंखों के नीचे, माथे, नाक के आस पास, गर्दन तथा हाथों पर झुर्रियां अभरने लग जाना बढ़ती उम्र पर स्वभाविक प्रक्रिया है । उम्र के अलावा और भी कई कारण है जिनसे कम उम्र मे झुर्रियां पड़ सकती हंै । यदि इन कारणों को जान लिया जाय तो इन झुर्रियां से काफी हद तक बचा जा सकता है ।
शरीर में इस्ट्रोजेन नामक हार्मोन की कमी ही झुर्रियां पड़ने का प्रमुख कारण है । युवावस्था में यह हार्मोन भरपूर मात्रा में रहता है लेकिन उम्र बढ़ने के साथ–साथ इसकी कमी आने लगती है जिससे त्वचा की कसावट कम होती जाती है और उसमें झुर्रियां पड़ने लगती है ४५ वर्ष कि उम्र के बाद शरीर में एलास्टिन नामक प्रोटीन का बनना भी धीमा और घटता जाता है और त्वचा ढीली पड़ जाती है । त्वचा में उपस्थित स्वेद ग्रन्थियों और तेल ग्रन्थियों की क्रियाशिलताकी कमी के कारण ये ग्रन्थियां ठीक से कार्य नहीं करती हंै तो त्वचा पर झर्रियां पड़ने लगती हंै । शरीर में पोषक तत्वों की जिससे शरीर में प्रोटीन विटामिन, मिनरल व फैटस जैसे चर्बी कम होने लगती है त्वचा ढीली पड़ जाती है और झुर्रिया पड़ने लगती हंै । सूरज की किरणो में मौजूद रहने वाली पैराबैगनी किरणें चमड़ी की कोशिकाओ पर सीधा प्रभाव डालती है और उन्हें तेजी से नष्ट कर डालती है । ऐसा देखा जाता है कि इनके शरीर पर झुर्रिया भी उतनी ही तेजी से प्रकट होती है । अनियमित दिनचर्या, मानसिक तनाव और पूरी नींद न लेने के कारण भी त्वच पर बुरा प्रभाव पड़ता है और झुर्रियां जल्दी पड़ने लगती है । आधुनिक सौन्दर्य प्रसाधनों का अत्यधिक प्रयोग करना भी झर्रियों को दावत देता है । ऐसा माना जाता है कि एक ओर तो इन सौन्दर्य सामग्रियों में प्रयुक्त होने वाले तेज रसायन त्वचा की कोशिकाओ पर बुरा प्रभाव डालते है तथा इन सौन्दर्य सामग्री के कण त्वचा के रोम छिद्रों में फंस कर उन्हें बंद कर देते है । इससे हमारी त्वचा स्वाभाविक रूप से सांस नही ले पाती है और उससे कोशिकाएं मुरझाने लगती है जिससे कम उम्र में ही झुर्रियां उत्पन्न होने लगती है ।
झाईयां
झाइयों को पिग्मेन्टेशन भी कहते है । यह खासतौर पर चेहरे, गालों की कनपटी के आसपास दिखायी देती है । इनका कत्थई रंग दूर से ही झाइयों की उपस्थिति दर्शाता है । झाइयां पुरुषो की अपेक्षा स्त्रियों में अधिक दिखायी देती है । झाइयां से मुक्ति पाने के लिए महिलाएं ब्लीच करवाती हैं, इससे बदलाव तो दिखायी देने लगता है लेकिन यह अस्थायी होता है और कुछ समय उपरान्त ये झाइयां और गहरी दिखायी देने लगती हैं ।
झाइयं मुख्यतः महिलाओं में मुख्यतः खून की कमी से होती है । महिलाओं में अर्भावस्था में आयरन की कमी व माहवारी के अनियमित होने से होती है । प्रसव, डायबिटीज, गर्भपात या मासिक धर्म में अधिक स्राव अथवा खस्नी बवासीर आदि किसी वजह से या तो खून ज्यादा निकल जाता है अथवा खून कम बनता है तब अन्य समस्याओं के अलावा झाइयों की समस्या भी सामने आती है ।
पुरुषो में मुख्यतः दवाइयों के साइड इफेक्टस के रूप में व पियूट्यरी ग्रन्थि के अनियमित स्राव से झाक्ष्यां उत्पन्न होती हंै । विभिन्न प्रकार के रसायन युक्त सौंदयृ प्रसाधन मार्केट में उपलब्ध है । इनके अत्यधिक प्रयोग से त्वचा पर बुरा प्रभाव पड़ता है जिससे झाइयां हो सकती है । झाइयों का उपचार शीघ्र कराना चाहिए अन्यथा इनके दाग हठीले बन कर स्थायी बन जाते है ।
झर्रियों का झाइयों का उपचार एवं बचाव
प्राचीन काल से ही ऐसा माना जाता है कि हमारे खान–पान का हमारे शरीर पर ही नहीं मन और सौन्दर्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है । आयुर्वेद में आहार–विहार जडी बूटियां, ध्यान एवं योग के द्वारा शरीर और मन में समन्वय बैठाकर रोग की चिकित्सा की जाती है । आयुर्वेद में झुर्रियों का कारण वात प्रकोप माना गया है । आधुनिक चिकित्सकों का भी कहना है कि त्वचा को स्वस्थ रखने और झुर्रियां को उभरने से रोकने के लिए शरीर के अन्य अंगों की तरह पोषक तत्व की जरूरत पड़ती है । त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए प्रोटिन, विटामिन ए, बी समूह, सी, ई तथा खनिज तत्वों जैसे झिंक, लोह, मैग्नेशियम युक्त खाद पदार्थो की जरूरत रहती है । यह सभी विटामिन व खनिज तत्व, हरी साथ सब्जियों, ताजा फलों, छिलके युक्त अनाज, अंकुरित अन्न एवं दालों, कम चिकनाई वाले दूध और दही में प्रचुर मात्रा में पाये जाते हंै । व्यायाम न सिर्फ सम्पूर्ण शरीर बल्कि त्वचा के लिए भी असरकारी है इससे त्वचा में लचीलापन बना रहता है, रक्त संचार तेज होता है तो त्वचा स्वस्थ व कान्तिमान होती है । व्यायाम की तरह मालिश भी रक्त संचार को बेहतर बनाकर त्वचा को स्वस्थ रखने में सहायक होती है । चेहरे की मालिश उंगलियो के पोरों से गोलाकार मालिश की जाती है । इससे रक्तसंचार तेज होता है, ताजगी प्राप्त होती है, त्वचा स्वस्थ कोमल चमकदार बनती है । इसके अलावा जिस तेल से मालिश करेगे उसके अपने लाभ होंगे त्वचा चिकनी व झर्रिया एवं झाइयां रहित होगी । आयुर्वेदिक लेपों का त्वचा पर प्रयोग करें एवं सप्ताह में कम से कम दो बार ५–७ मिनट तक चेहरे को पानी की भाप दें जिससे त्वचा पर झुर्रियां पड़ने की गति अत्यन्त धीमी पड़ पाती है । बाष्प स्नान से रोमछिद्र पुनःखुलने लग जाते है तथा रक्त संचार बढ़ जाता है । सभी को मानसिक तनाव से बचना चाहिए तथा कम से कम ८ घंटे की नींद का आनन्द लेना चाहिए । गहरी नींद से मानसिक तनाव में गिरावट आती है तथा त्वचा की पेशियों को अपनी मरम्मत करने का अवसर मिलता है । धूम्रपान एवं मदिरा सेवन से बचना चाहिए । प्राणायाम एवं योगासनों को चिकित्सक की सल्लाह पर करना चाहिए ।
झुर्रियों को नष्ट करने के लिए मसूर की दाल रात को भिगोकर अगले दिन कच्चे दूध में पीसकर पेस्ट बना लें और चेहरे पर आधा घंटे तक लगा रहने दें सुखने पर ताजे पानी से चेहरे पर धो लें । बदाम रोगन या जैतून के तेल की मालिश से झुर्रियां कम होती हंै । बादाम रोगन या जैतून के तेल की मालिश से झुर्रिया कम होती है । पके हुए केले का लेप चेहरे पर लगाने से धीरे धीरे झर्रियों समाप्त होती ही । ऐलोवेरा के गूदे से चेहरे की मालिश करनी चाहिए तथा कुछ समय उसे लगे रहने के बाद ही धोना चाहिए । संतरे के छिलके छाया में सुखाकर बारीक चूर्ण बना लें, इस चूर्ण की कुछ मात्रा में बेसन मिलाकर उबटन लगाना चाहिए । शहद व नींबू को २ः१ के अनुपात में मिलाकर चेहरे पर लेप करें व उसके कुछ समय बाद चेहरा धो डालें । प्रातः काल रात्रिभर पानी में भीगें हुए आवले के चूर्ण का चेहरेपर उबटन करके उसी पानी से चेहरा धोन पर काफी हद तक झुर्रियां से छुटकारा पाया जा सकता है इसके अलावा आधुनिक कॉस्मेटिक से बचना चाहिए । पानी का ज्यादा से ज्यादा सेवन करना चाहिए ।
झाइयों के होन का प्रमुख कारण खून की कमी है । अतः सर्वप्रथम रक्त में भोजन में आयरन की मात्रा बढ़ाएं । सौन्दर्य प्रसाधनों का प्रयोग कम से कम करें । यदि करे तो हर्बल प्रसाधनों का प्रयोग करना चाहिए । त्वचा को धूप से बचाएं । यदि आप बालो को रंगने के लिए हेयर डाय का प्रयोग करते हंै तो डाय के प्रयोग के एक या दो दिन बाद मेहंदी का लेप बालों में करे ताकि बालों में रसायनों का असर कम हो सके । चेहरे पर ब्लीचिंग का प्रयोग न करें सेब का गूदा चेहरे पर मलने से झाइयां दूर होती हंै बादाम की गिरी को रात में भिगोकर सुबह उसका छिलका उतार कर गिरी को पत्थर पर घिसकर एक चम्मच नींबू का रस व एक चम्मच शहद इसमें मिलाकर पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाएं । आधे घंटे बाद इसे धो लें । ऐसा करने से झाइयां कम पड़ती हंै । जायफल को कच्चे दूध में धिसकर लगाने से झाईयां दूर होती है । ग्वारपाठे या ऐलोवेरा का गूदा गाय के दूध में मिलाकर झाईयों को लेप करना चााहिए । ताजे टमाटर काटकर उसमे चेहरे पर मसाज करने पर भी झाइयां कम होती हैं ।
आयुर्वेदिक औषधियों में पुर्ननवा मण्डूर, आरोग्यवर्धिनी वटी, फलत्रिकादि क्वाथा, कुमारी आसव, एलोवेरा का जूस, आंवल मुरब्बा, चूर्ण या ताजा प्रयोग करना चाहिए क्योंकि यह एण्टी आक्सीडेन्ट होता है तथा इसमें विटामिन सी उचित मात्रा में होता है । स्वर्ण भस्म का सेवन करने से भी चेहरे पर तेज आता है और झुर्रियां दू होती हंै । लौह भस्म, प्रवाल भस्म, मुक्ताभम्म, खदिरारिष्ट, सारिवाद्यासव उपरोक्त चिकित्सक की सलाह पर किया जा सकता है ।

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