
मुन्नालाल गुप्ता
गांधी शहर, वर्धा
9 अगस्त- इसी दिन भारत में महात्मा गांधी के नेतृृत्व में ” भारत छोड़ो आंदोलन 1942″ आंदोलन की शुरुआत हुई। इस अंदोलन से सम्बन्धित पहला प्रस्ताव महात्मा गांधी द्वारा स्थापित सेवाग्राम आश्रम/ बापू कुटीर , वर्धा में कांग्रेस वर्किंग कमेटी के समक्ष रखा गया था।
महात्मा गांधी जी द्वारा स्थापित आश्रमों का भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान है। भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के इतिहास में इन आश्रमों के योगदान को ईमानदारी से रेखांकित नहीं किया गया है। दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गांधी का पहला अहिंसक सत्याग्रह 1906, और 1910 में फीनिक्स एवम टॉलस्टाय आश्रमों में, भारत में 1930 का नमक सत्याग्रह, साबरमती आश्रम, अहमदाबाद में और 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन का पहला प्रस्ताव वर्धा स्थित सेवाग्राम आश्रम में रखा गया था। इन आश्रमों ने एक और जहां महात्मा गांधी के सत्याग्रह आंदोलन के लिए अहिंसक स्वमसेवक तैयार किए तो दूसरी ओर प्रति दिन के जीवन से जुड़ी आचार व्यवहार को अहिंसक तरीके से कैसे जिया जाए, आदि से सबंधित अनेक प्रयोग किए। और इन्हीं प्रयोगों की निष्पति को महात्मा गांधी के सत्य के प्रयोग अथवा आत्मकथा के रुप में आई।
